सोने के गहनों पर अनिवार्य हॉलमार्किंग वापस ले रही है सरकार, जानिए क्या है सच्चाई?

 

– कशिश राजपूत

 

 

हॉलमार्किंग यह निर्धारित करती है कि कोई सुनार, जौहरी या सराफा अपने ग्राहकों को एक तरह की गुणवत्ता देता है या नहीं। फिलहाल 14, 18, 20, 22, 23 और 24 कैरेट के आभूषणों को बेचने की अनुमति दी गई है। यानी कोई भी सुनार इस कैरेट के गहनों को बचाकर ग्राहक को पूरी जानकारी देगा। अब सवाल यह है कि ग्राहक को कैसे पता चलेगा कि उसके हाथ में जो आभूषण आता है वह शुद्ध सोने का बना है और उसका कैरेट सही है।

 

गोल्ड ज्वैलरी पर अनिवार्य हॉलमार्किंग को वापस ले रही है सरकार, जानें क्या  है सच्चाई? | Mandatory hallmarking of gold jewellery on track clarifies  government | TV9 Bharatvarsh

 

सोने की हॉलमार्किंग से सोने के आभूषणों की कालाबाजारी रोकने में मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित होगा कि उन्हें शुद्ध गुणवत्ता वाला सोना मिले। आपको बता दें कि पिछले 5 वर्षों के दौरान देश भर में गोल्ड हॉलमार्किंग केंद्रों की संख्या 454 से लगभग 25 प्रतिशत बढ़कर 945 हो गई है। इसमें से 84 ऐसे केंद्र केंद्र सरकार की सब्सिडी योजना के तहत स्थापित किए गए हैं। 

 

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सरकार ने कहा कि सोने के गहनों पर अनिवार्य ‘हॉलमार्किंग’ 16 जून से चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है और इसे वापस लेने का सर्कुलर फर्जी है। आधिकारिक बयान में कहा गया है, कुछ सोशल मीडिया पर यह बताया जा रहा है कि भारत सरकार ने सोने के आभूषणों पर अनिवार्य हॉलमार्किंग प्रणाली को वापस लेने का आदेश जारी किया है। ये पूरी तरह से फर्जी है |

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