गुजरात निकाय चुनाव: ओवेशी ने किया कमाल, क्या यूपी में भी मचाएंगे धमाल?

Gujarat Municipal Election

 

-अक्षत सरोत्री

 

गुजरात में हुए निकाय चुनाव (Gujarat Municipal Election) बहुत सी परिस्थितियां साफ़ करते हैं। किसान आंदोलन की हवा को जो प्रभाव हमें पंजाब में देखने को मिला उसका कोई भी प्रभाव गुजरात में दूर-दूर तक नहीं पड़ा है। हाँ गुजरात में आप और ओवेशी ने एंट्री जरूर मार दी है। जिसका सीधा नुकसान हम कहें तो कांग्रेस को जरूर उठाना पड़ा है। कांग्रेस का गुजरात निकाय चुनाव में सूपड़ा साफ़ हो गया है।

 

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छह नगर निगमों पर भाजपा का कब्जा

 

 

सभी छह नगर निगम (Gujarat Municipal Election) में बीजेपी ने अधिकतर सीटों पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, सूरत में आम आदमी पार्टी ने चौंकाया तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी पहले ही चुनाव में यहां चौका लगाया है। अहमदाबाद के जमालपुर में एआईएमआईएम के चार उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।

 

अहमदाबाद 141 सीटों पर भाजपा का हुआ कब्जा

 

 

अहमदाबाद की 192 सीटों में से 141 के नतीजे अब तक सामने आए हैं। बीजेपी ने 116 सीटों पर जीत हासिल की है तो कांग्रेस को 21 सीटों पर सफलता मिली है। गुजरात में छह नगर निगमों के लिए हुए चुनाव की मतगणना में भाजपा कुल 576 सीटों में से 300 पर अब तक जीत दर्ज कर चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

 

 

इन पार्टियों ने जीती इतनी सीटें

 

 

आयोग ने कहा कि कांग्रेस ने (Gujarat Municipal Election) अब तक सिर्फ 36 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, मतगणना अब भी जारी है। कांग्रेस, सूरत में एक भी सीट नहीं जीत सकी। वहीं आम आदमी पार्टी (आप) ने आठ सीटें जीत कर अपनी अच्छी खासी पैठ बनाई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जामनगर में तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। अहमदाबाद में कुल 192 सीटों, राजकोट में 72, जामनगर में 64, भावनगर में 52, वड़ोदरा में 76, और सूरत में 120 सीटों पर 21 फरवरी को मतदान हुआ था।

 

 

आम आदमी पार्टी ने भी मारी एंट्री

 

 

सूरत के व्यापारियों का बड़ा वर्ग भी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की (Gujarat Municipal Election) सरकार के कामकाज से प्रभावित है, जिस तरह अरविंद केजरीवाल ने सूरत की अपनी सभा में दिल्ली के व्यापार मॉडल की तारीफ की उससे व्यापारियों के मन में केजरीवाल को लेकर एक भरोसा तो जरूर जगा है और इस भरोसे ने ही सूरत की महानगरपालिका में आम आदमी पार्टी को दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने का मौका दिया है।

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