हरियाणा विधानसभा: अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले हुड्डा क्या खुद हैं अल्पमत में?

Haryana Assembly

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

किसान आंदोलन का असर हरियाणा विधानसभा (Haryana Assembly) पर भी थोड़ा बहुत पड़ा है। क्योंकि जींद महापंचायत में यह ऐलान हुआ था कि अब गांवों में जजपा और भाजपा के नेताओं को आने नहीं देंगे और हुक्का पानी बंद कर दिया जाएगा। जिसको लेकर विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह उम्मीद जरूर जताई होगी कि कुछ विधायक जजपा के टूट जाते हैं तो कांग्रेस हरियाणा में सरकार बना सकती है। जानकारी के अनुसार भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक दाव खेला था वो मौजूदा जेजेपी और भाजपा सरकार के खिलाफ किसान आंदोलन की आड़ में अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले थे। लेकिन अगर हम तथ्य देखें तो जो स्थिति निकल कर सामने आ रही है उसके तहत सरकार बनाने का सपना देखने वाली कांग्रेस खुद अल्पमत में आ गई है। ऐसा कैसे है आपको आंकड़ों के माध्यम से समझाते हैं।

 

किसानों को रोकने के लिए लगाई किलें उखाड़ने का वीडियो वायरल

 

 

इस समय यह है हरियाणा विधानसभा का हाल

 

इस समय देखा जाए तो 90 सदस्यीय विधानसभा (Haryana Assembly) में ऐलनाबाद से अभय चौटाला ने किसान आंदोलन के पक्ष में विधासभा से इस्तीफा दे दिया और कालका के कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी की बद्दी कांड में 3 साल की सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। अब इस समय दो सीटें विधानसभा में रिक्त हैं। अब 88 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए 46 की बजाय 45 विधायकों की जरूरत है। स्पीकर के वोट को यदि छोड़ दिया जाए तो भाजपा को सिर्फ 44 विधायक दिखाने हैं। जबकि स्थिति को साफ़ तौर पर देखा जाए तो इस समय भाजपा के विधायकों की संख्या 55 है।

 

अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए यह है नियम

 

अविश्वास (Haryana Assembly) प्रस्ताव लाने के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा को लगता है कि तीन कृषि कानूनों को लागू करने के बाद सरकार विधायकों का समर्थन खो चुकी है। इसलिए वह सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं। विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 40 है। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जजपा के 10 विधायकों ने भी भाजपा को अपना समर्थन दे रखा है। इसके अलावा पांच निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दे रखा है। कांग्रेस विधायकों की संख्या 31 थी। कालका सीट खाली होने के बाद यह संख्या 30 रह गई है। कोई ऐसा समीकरण नहीं बन रहा है कि यह अविश्वास प्रस्ताव के सहारे भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस सरकार बना सकेंगे।

 

कांग्रेस में भी चल रही है गुटबाज़ी?

 

अविश्वाश प्रस्ताव लाने के सवालों के बीच कांग्रेस की प्रेस वार्ता का एक वीडियो सामने आया है जिसमें 30 में से केवल 17 विधायक दिखाई दे रहे हैं। तो इस पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या 17 विधायक हरियाणा विधानसभा (Haryana Assembly) में कहेंगे कि सरकार अल्पमत में हैI अगर हम इस समय राजनीति समीकरणों का आंकलन करें तो एक ही सवाल सामने आता है कि मौजूदा सरकार अल्पमत में है या फिर विपक्ष अल्पमत में है?

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