51 शक्तिपीठों में शामिल है ये मंदिर, हिंदू-मुस्लिम एकता का है प्रतीक

Spread the love

 

-नीलम रावत, संवाददाता

 

17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरूआत हो रही है. नवरात्र के मौके पर भक्त माता के मंदिरों में जाकर उनका आशीर्वाद लेते हैं. भारत में माता के अनेकों मंदिर है लेकिन मां का एक प्रसिद्ध मंदिर पाकिस्तान में स्थित है. ये मंदिर माता सती के 51 शक्तिपीठों में शामिल है. ब्लूचिस्तान में स्थित हिंगलाज माता मंदिर जिसे कि हिंगलाज भवानी मंदिर भी कहा जाता है.

 

 

51 शक्तिपीठों में शामिल

 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिंगलाज मंदिर वहां स्थित है जहां भगवान शिव की पहली पत्नी देवी सती का सिर गिरा था. इसीलिए मंदिर में माता अपने पूरे रूप में नहीं दिखतीं, बल्कि उनका सिर्फ सिर ही दिखाई देता है. मंदिर के पास 10 फीट लंबी अंगारों की एक सड़क है. ऐसा माना जाता है कि जो भक्त शोलों भरे इस रास्ते पर चलता हुआ आता है हिंगलाज माता उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

 

पूरी होती है मनोकामना

 

मान्यता है कि माता के इस मंदिर में भक्तों की हर मनोकामना पूरी हो जाती है. बताया जाता है कि हिंगलाज माता के इस मंदिर में मनोरथ सिद्धि के लिए गुरु गोरखनाथ, गुरु नानक देव ओर दादा मखान जैसे आध्‍यात्मिक संत भी यहां आ चुके हैं.

 

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक

 

पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू जहां मंदिर में शीश झुकाते है. वहीं मुस्लिम श्रद्धालु भी मंदिर में सजदा करते हुए नजर आते हैं. जब पाकिस्तान का जन्म नहीं हुआ था और भारत की पश्चिमी सीमा अफगानिस्तान और ईरान थी, उस समय हिंगलाज तीर्थ हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ तो था ही, बलूचिस्तान के मुसलमान भी हिंगला देवी की पूजा करते थे. हिंगलाज शक्तिपीठ हिन्दुओं और मुसलमानों का संयुक्त महातीर्थ था. हिन्दुओं के लिए यह स्थान एक शक्तिपीठ है और मुसलमानों के लिए यह ‘नानी पीर’ का स्थान है.

 

ऊंची पहाड़ी पर बना यह मंदिर गुफा के रूप में है. इस मंदिर में कोई दरवाजा नहीं है. मान्‍यता है कि हिंगलाज माता यहां हर सुबह स्‍नान करने आती हैं. मंदिर परिसर में श्रीगणेश, कालिका माता की प्रतिमा भी स्‍थापित है. यहां ब्रह्मकुंड और तीरकुंड दो प्रसिद्ध तीर्थ भी हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *