उत्तराखंड में स्थित बाबा बैजनाथ का धाम, यहीं हुआ था शिव और पार्वती का विवाह!

करिश्मा राय तंवर

 

बैजनाथ मंदिर उत्तराखंड के काफी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थलों में से एक है जिसके बारे में कहा जाता है कि  यह मन्दिर सिर्फ एक रात में बनाया गया था । बैजनाथ मन्दिर लगभग 1000 साल पुराना है। जो कौसानी से महज 17 किलोमीटर की दूरी पर गोमती नदी के तट पर स्थित है । पर्यटकों के लिए यहां सबसे ज्यादा आकर्षण का केन्द्र 12वीं सदी में निर्मित शिव, गणेश, पार्वती, चंडिका, कुबेर, सूर्य मंदिर हैं । यहां पत्थर के बने हुए कई मन्दिर हैं , जिनमें मुख्य मन्दिर भगवान शिव का है। यह मंदिर चिकित्सकों के स्वामी के रूप में शिव को समर्पित हैं। जहां हजारों पर्यटक भगवान वैद्यनाथ के दर्शन करने आते हैं.

 

 

इसके मुख्य मंदिर में पार्वती की एक सुंदर मूर्ति है, जिसे काले पत्थर में पिरोया गया है। साथ ही, मुख्य मंदिर के रास्ते में महंत के घर के ठीक नीचे, बामणी का मंदिर है। मंदिर परिसर के ठीक बाहर मछलियों से भरा एक तालाब है जहाँ “गोल्डन महाशीर” और मछली पकड़ना पूरी तरह से प्रतिबंधित है लेकिन तीर्थयात्री मछलियों को आटा और चना चढ़ा सकते हैं। यह पर्यटकों के आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र है।

 

 

बैजनाथ मंदिर का इतिहास

कहा जाता है कि बैजनाथ मंदिर का निर्माण बागेश्वर जिले में करीब 1150 इसवी में गोमती नदी के किनारे पर कुमाऊ कत्युरी राजा द्वारा करवा गया था । बैजनाथ को पहले “कार्तिकेयपुर” के नाम से जाना जाता था , जो कि 12वीं और 13वीं शताब्दी में कत्यूरी वंश की राजधानी हुआ करती थी । यह मंदिर 1126 मीटर की ऊंचाई पर गोमती नदी के बाएं किनारे पर स्थित है | जो विशाल पाषण शिलाओं से बनाया गया है। इसके अलावा बैजनाथ शहर भी मंदिर से अपना नाम रखता है।

 

 

बता दें कि मंदिर के पोर्च में दो लंबे शिलालेख हैं जो यह संकेत देते हैं कि वर्तमान में निर्माण होने से पहले ही यहाँ शिव का एक मंदिर मौजूद था। वहीं यह मंदिर मंदिर प्रारंभिक मध्यकालीन उत्तर भारतीय वास्तुकला का एक आदर्श उदाहरण है, जिसे मंदिरों की नागरा शैली के रूप में जाना जाता है। बैजनाथ मंदिर को अति सुंदर नक्काशीदार और मूर्तिकला मंदिरों के लिए जाना जाता है, जिन्हें पश्चिमी हिमालय की कुछ बेहतरीन कृतियों में माना जाता है।

 

 

इसके अलावा पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि शिव और पार्वती ने गोमती और गरुड़ गंगा नदी के संगम पर विवाह रचाया था | बैजनाथ अपने पौराणिक मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। यहां पर 18 मंदिरों का एक समूह था जिसके केंद्र में भगवान शिव का मंदिर था। बैजनाथ से करीब 10 किमी की परिधि में आज भी पौराणिक मंदिरों और मूर्तियों के अवशेष पाए जाते हैं। यही वजह है इस मंदिर में पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है

 

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