इस मंदिर में दंपति का पूजा करना वर्जित,पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते दर्शन

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-नीलम रावत, संवाददाता

भगवान के आशीर्वाद से जीवन में खुशियां आती हैं. अक्सर नव दंपति को अपने वैवाहिक जीवन की शुरूआत करने से पहले भगवान का आशीर्वाद लेने को कहा जाता है. लेकिन भारत में एक ऐसा मंदिर मौजूद है जहां पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं कर सकते. इस मंदिर में दंपति का पूजा करना पूरी तरह से वर्जित है.

ये मंदिर देवभूमि हिमाचल प्रदेश के शिमला के रामपुर में स्थित श्राई कोटि माता मंदिर है. मान्यता है कि यहां जोड़े में पूजा नहीं करनी चाहिए वर्ना जोड़ी टूट जाती है. अन्य मंदिरों में यह नियम होता है कि यदि कोई विवाहित है तो जोड़े में ही उसे पूजा करनी चाहिए, तभी उसे पूजा का लाभ मिला है, लेकिन श्री कोटि माता मंदिर का नियम सबसे अलग है.

इस मंदिर में आने वाले पति-पत्नी मंदिर में साथ आ तो सकते है, लेकिन देवी की पूजा और दर्शन के लिए अलग-अलग ही जाना होता है. कहा जाता है कि जो पति-पत्नी एकसाथ इस मंदिर में दर्शन कर लेते हैं, उनके जीवन में अनेक कष्ट आते हैं और उन्हें अलग तक होना पड़ सकता है.

परंपरा के पीछे पौराणिक कथा

एक बार कार्तिकेय और गणपति जी में इस बात पर लड़ाई हुई कि किसका विवाह पहले होगा. दोनों लड़ते हुए जब भगवान शिव व देवी पार्वती के पास पहुंचे तो भगवान शिव ने कहा कि दोनों में से जो ब्रह्मांड के चक्कर लगा कर सबसे पहले पहुंचेगा, उसका विवाह पहले किया जाएगा. इतना सुनते ही कार्तिकेय ब्रम्हांड का चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े, लेकिन भगवान गणेश ने अपने माता पिता का चक्कर लगा लिया.

उधर जब कार्तिकेय ब्रह्मांड का चक्कर लगा कर पहुंचे तो देखा कि गणपति जी उनसे पहले वहां मौजूद थे और इतना ही नहीं उनका विवाह भी हो चुका था. यह सब देख कर कार्तिकेय बहुत क्रोधित हुए और कभी विवाह ना करने की प्रतिज्ञा कर हिमालय के श्री कोटी माता मंदिर के पास आ कर तपस्या करने लगे. अपने पुत्र कार्तिकेय के विवाह ना करने की प्रतिज्ञा को जानकर माता पार्वती अत्यधिक दुखी हो गईं और दुख और क्रोध में यह श्राप दे दिया कि यहां जो भी जोड़ा साथ में देवी का दर्शन करेगा उसका जोड़ा टूट जाएगा. इसके बाद से इस मंदिर में कभी भी कोई जोड़ा साथ में पूजा नहीं करता.

मान्यता है कि जो भी भक्त इस मंदिर की परंपरा का पालन करते हुए दर्शन करता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं मां जरूर पूरा करती है.

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