“मैं माँ से बहुत प्यार करता हूँ उसे फांसी मत दो”, शबनम के बेटे ने लगाई राष्ट्रपति से गुहार

Shabnam son

 

-अक्षत सरोत्री

 

आजाद भारत में पहली बार किसी महिला (Shabnam son) को फांसी होनी जा रही है। इस महिला ने इतना जघन्य अपराध किया है जिसे सुनकर किसी भी व्यक्ति के रोंगटे खड़े हो जाएँ। अब इस महिला जिसका शबनम है जो की अमरोहा की रहने वाली है जिसे मथुरा की सेंट्रल जेल में फांसी होगी। जिसकी तैयारियां चल रही है। अब इसी शबनम के 12 साल के बेटे ने भारत के राष्ट्रपति से गुहार लगाई है की उसकी माँ की सजाए मौत की सजा को उम्र कैद में बदला जाए।

 

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शबनम ने 2008 में किया था यह जघन्य अपराध

 

शबनम को 2008 में एक बच्चे सहित उसके परिवार के (Shabnam son) सात सदस्यों की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी, क्योंकि उन्होंने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में उसके प्रेमी के रिश्ते का विरोध किया था। शबनम स्वतंत्र भारत में फांसी की सजा पाने वाली पहली महिला अपराधी हो सकती है। वह वर्तमान में रामपुर महिला जेल में बंद है। शबनम के बेटे मोहम्मद ताज ने कहा, “मैं अपनी मां से प्यार करता हूं। राष्ट्रपति अंकल से मेरी एक ही मांग है कि वह मेरी मां को फांसी न दें।

 

 

ताज ने एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति से लगाई है गुहार

 

ताज ने एक स्लेट पर (Shabnam son) लिखकर कहा, “राष्ट्रपति अंकल जी, कृपया मेरी मां शबनम को क्षमा करें।” 12 साल का लड़का अपने पालक माता-पिता उस्मान सैफी के साथ रह रहा है, जो कभी कॉलेज में शबनम का जूनियर था। सैफी अब एक पत्रकार के रूप में काम करता है और कई बार जेल में ताज की मां से मिल चुका है। सैफी ने कहा कि वह ताज को अच्छी शिक्षा प्रदान करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

 

पालक पिता उस्मान सैफी ने दी यह जानकारी

 

सैफी ने कहा, “उसकी मां का (Shabnam son) अपराध चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, लेकिन ताज अपराधी नहीं है।” अमरोहा की एक अदालत को शबनम की फांसी की तारीख पर फैसला करना बाकी है। हालांकि, फांसी के लिए मथुरा में तैयारी चल रही है। मथुरा देश की एकमात्र जेल है, जिसमें महिलाओं को फांसी देने के लिए एक कक्ष है।

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