LAC पर तनाव के बीच अमेरिका के विदेशमंत्री और रक्षा मंत्री का भारत दौरा, बैठक से पहले चीन-पाकिस्तान में खलबली

रवि श्रीवास्तव

चीन से चल रहे तनाव के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री भारत आए हैं, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर भारत टू प्लस टू वार्ता के लिए आए हैं। माना जा रहा है इस दौरे से चीन और पाकिस्तान में जबरदस्त बैचेनी बढ़ी है। क्योंकि इस बैठक में बैठक में चीन से लेकर कोरोना वैक्सीन समेत कई मुद्दों पर बात होगी।

अमेरिका के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री ऐसे वक्त में भारत आए हैं, जब अमेरिका में चुनाव है, चीन से भारत का तनाव है और साथ ही दक्षिण चीन सागर में चीन लगातार गुस्ताखी कर रहा है। माना जा रहा है जब दोनों देशों के मंत्री बैठक करेंगे तो बैठक में चीन का मसला सुलझाने के अलावा दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य समझौता होगा। इसके तहत दोनों देश बेसिक एक्‍सचेंज ऐंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट फॉर जियोस्‍पेशियल कोऑपरेशन पर हस्‍ताक्षर करेंगे।

टू प्लस टू वार्ता को समझिए

ये वर्ता सीधे तौर पर दो देशों के शीर्ष नेतृत्व को एक दूसरे से जोड़ता है,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2017 में अपनी पहली मुलाकात के दौरान 2+2 वार्ता की घोषणा की थी। सितंबर 2018 में नई दिल्ली में इस बैठक का पहला संस्करण आयोजित हुआ था जबकि पिछले साल दिसंबर में वॉशिंगटन में दूसरी बार वार्ता हुई थी। हालांकि ये फॉर्मूला जापान से निकला है जिसका एक मात्र मकसद दो देशों के बीच आपसी समांजस्य बैठाना है साथ किसी बड़े मसले पर दो देशों को राजनायिक औऱ राजनीतिक पर मेलजोल बढ़ाना है । खास बात ये है कि 2+2 मीटिंग से पहले पिछले दिनों जापान में क्वॉड वार्ता आयोजित हुई थी। क्वॉड चार देशों- अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के समूह को कहा जाता है।

पाकिस्तान और चीन में बढ़ी बैचेनी

दुनिया की दो महाशक्ति जब एक दूसरे से डायरेक्ट संवाद कर रही है तो जाहिर है चीन और पाकिस्तान में खलबली बची है, पूर्वी लद्दाख में चीन करीब 45 सालों में सबसे अड़ियल रवैया अपनाए हुए हैं. दोनों देशों के बीच तकरार भी चरम पर हैं .ऐसेे में अमेरिका और भारत चीन को सबक सिखाने के लिए कोई MOU साइन ना कर लें ये बात चीन को सताए जा रही है, चीन को टेंशन इसलिए भी है क्योंकि भारत और यूएस के बीच बढ़ती सिक्यॉरिटी कॉर्पोरेशन को चीन हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपनी महत्वकांक्षा पर खतरे के रूप में देख रहा है। और चीन पर शिंकजा कसता देख पाकिस्तान भी बेहद परेशान है

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