पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो इलाके में जारी डिसइंगेजमेंट के तहत भारतीय और चीनी सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पर भारत की कड़ी नजर

LADAKH

 

– कशिश राजपूत

 

 

पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) इलाके में जारी डिसइंगेजमेंट के तहत भारतीय और चीनी सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पर भारत ने कड़ी नजर बनाई हुई है | दोनों देशों की सेनाएं डिसइंगेजमेंट (Disengagement) समझौते के बाद लगातार फॉरवर्ड प्वाइंट (Forward Point) से लगातार पीछे हट रही हैं और टैंकों को पीछे ले जा रही हैं |

 

 

बताया जा रहा है कि डिसइंगेजमेंट की प्रकिया पूरी होने के 48 घंटे बाद एक बार फिर कॉर्प्स कमांडर लेवल की बैठक होगी | जिसपर आगे की रणनीति  तय होगी | जानकारी के मुताबिक फिलहाल दोनों सेनाओं ने अपने टैंक और दूसरे भारी हथियार साउथ बैंक से वापस ले लिए हैं |

 

 

भारतीय सेना फिंगर 3 की पोजीशन पर जाकर मेजर धान सिंह थापा पोस्ट पर अपना डेप्लायमेंट रखेगी। वहीं चीन की पिपुल्स लिबरेशन आर्मी अब फिंगर 8 से पीछे यानी शिंजाब और खुर्नाक फोर्ट की तरफ अपने डिप्लायमेंट के साथ होगा। यानी जितने भी चीनी ढांचा जो फिंगर 4 से लेकर फिंगर 8 तक बनाए गए हैं उसे तोड़ा जाएगा। फिर पीएलए अपनी पोजीशन पर वापस चला जाएगा।

 

 

डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया क्या होगी-

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की संसद को बताया कि दोनों देश फाॅरवर्ड डिप्लाॅमेंट हटाएंगे। यानी  दोनों देशों की टुकड़ियां एक-दूसरे के बेहद करीब तैनात थीं, वहां से पीछे हटेंगी। चीन अपनी टुकड़ियों को पैंगोंग झील के उत्तरी तट में फिंगर 8 के पूर्व की तरफ रखेगा जबकि भारत अपनी टुकड़ियों को फिंगर 3 के पास परमनेंट थनसिंह थापा पोस्ट पर रखेगा। तरह की कार्रवाई दोनों पक्षों द्वारा दक्षिण बैंक क्षेत्र में भी की जाएगी। दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि फिंगर 3 और फिंगर 8 के बीच का क्षेत्र अस्थायी रूप से नो-पैट्रोलिंग जोन बन जाएगा। जब तक दोनों पक्ष गश्त बहाल करने के लिए सैन्य और राजनयिक चर्चा के माध्यम से एक समझौते पर नहीं पहुंच जाते।

 

 

 

 

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