-विनोद कुमार, वरिष्ठ संवाददाता

जम्मू-कश्मीर की सियासत में बदलाव का दौर शुरू हो गया है। धारा 370 में संशोधन के कट्टरविरोधी सियासी नेताओं ने अब मोल भाव शुरू कर दिया है। अब बात चल रही है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की। अल्ताफ बुखारी की अपनी पार्टी के नेता पहले से ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर पीएम और केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात कर चुके है। अब नेशनल कांफ्रेंस भी सियासी मोलभाव के जुगाड़ में है। आज सीनियर और जूनियर अब्दुल्ला दोनों ने ही अपने पत्ते खोल दिये है। दोनों ने अलग अलग ब्यान जारी कर साफ कर दिया है कि पूर्ण राज्य के मुद्दे पर बातचीत हो सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि जब तक पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता तब तक वो चुनाव नहीं लडेंगे। इस का साफ संकेत है कि नेशनल कांफ्रेंस अब सियासत बातचीत को लेकर पूरी तरह तैयार हैै। डा० फारूक अब्दुल्ला ने तो साफ तौर पर पूर्ण राज्य की मांग की है।

अचानक बदलाव का मुख्य कारण अल्ताफ बुखारी की अपनी पार्टी है। अपनी पार्टी की दिल्ली के साथ नजदीकियां नेशनल कांफ्रेंस को रास नहीं आ रही है। अगर दिल्ली पूर्ण राज्य का दर्जा देती है तो कहीं सियासी मुनाफा अल्ताफ बुखारी को न मिल जाए यही नेशनल कांफ्रेंस की मुख्य चिंता है। इसी चिंता के बीच नेशनल कांफ्रेंस ने अब अपनी पार्टी की लाइन पकड़ ली है और पूर्ण राज्य का दर्जा मांगना शुरू कर दिया है। अगर पीडीपी की बात करें तो महबूबा मुफ्ती फिलहाल नजरबंद है। ईद पर उनको छोड़ा जा सकता है। रिहाई के बाद ही पीडीपी जम्मू-कश्मीर की सियासत में अपनी भूमिका की रणनीति का खुलासा करेगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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