हिंदी और डोगरी भी होगी जम्मू कश्मीर की राजभाषा, 5 राजभाषाओं के लिए सदन में मोदी सरकार लाएगी बिल, कैबिनेट बैठक में मिली मंजूरी

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रवि श्रीवास्तव

जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के खात्मे के बाद अब सरकार वहां के लोगों के दिलों में जगह बनाने में जुटी है, यही वजह है कि सरकार ने जम्मू कश्मीर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, दरअसल  केंद्र सरकार ने प्रदेश में नए नियमों के साथ अब कश्मीरी, डोगरी, हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषाओं को राजभाषा का दर्जा दे दिया है, ये फैसला मोदी सरकार की कैबिनेट मीटिंग के बाद लिया गया है। पहले उर्दू और अंग्रेजी ही यहां पर कामकाज की भाषा थी। हालांकि अब प्रदेश में कुल 5 राजभाषाएं हैं, जिन्हें केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिली है

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नए विधेयक के तहत उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिंदी और अंग्रेजी जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाएं होंगी।’ इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘जम्मू और कश्मीर में डोगरी, हिंदी और कश्मीरी को आधिकारिक भाषाओं के रूप में शामिल करना न केवल लंबे समय से लंबित सार्वजनिक मांग की पूर्ति है, बल्कि 5 अगस्त, 2019 के बाद समानता की भावना को ध्यान में रखते हुए इसे मंजूरी दी गई है।

 क्या होगा इसका असर ?

जिन भाषाओं को राज्य भाषा का दर्जा दिए जाने की बात हो रही है, उनमे एक है डोगरी डोगरी भाषा मूल रूप से डुग्गरों की भाषा कही जाती है। इसका इस्तेमाल जम्मू संभाग के 10 जिलों में किया जाता है। ऐसे में कश्मीरी के साथ डोगरी को राजभाषा बनाने के साथ सरकार ने जम्मू डिविजन के लोगों को एक समानता का संदेश देने की कोशिश की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में 50 लाख के आसपास लोग डोगरी भाषा का उपयोग करते हैं, जाहिर है राज्यभाषा बनने के बाद अब प्रदेश में इन भाषाओं का चलन बढ़ जाएगा। साथ ही जम्मू संभाग में लंबे समय से की जा रही मांग को पूरा करके एक बार फिर मोदी सरकार ने घाटी में हो रहे अभूतपूर्व बदलाव कर अपना औऱ सरकार का लोहा मनवा लिया है

फैसले को पूरी तरह अमल में आने में लगेगा वक्त

भले ही केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है। लेकिन सरकार के मुताबिक, इसे अब अमल में लाने के लिए संसद के सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा। यह सत्र 14 सितंबर से शुरू होने को है। 5 अगस्त 2019 के बाद से ही राज्य में इन भाषाओं को आधिकारिक राजभाषा बनाने की मांग की जा रही थी।

 

 

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