बिहार की हार से कांग्रेस में कोहराम, कपिल सिब्बल का नेतृत्व पर वार, सीएम गहलोत का तीखा पलटवार, जानिए सबकुछ

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रवि श्रीवास्तव

 

बिहार में मिली करारी हार के बाद अब कांग्रेस की कलह वाली कलई खुलने लगी है, पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में मिली हार को  इशारों में आलाकमान की हार बताई  है, सिब्बल ने अपने बयानों से जो संकेत दिए हैं उसके मुताबिक कांग्रेस का नेतृत्व हार पर मंथन करने को राजी ही नहीं है, और ना ही किसी बदलाव को चाहता है, सिब्बल ने साफ कह दिया कि जब पार्टी निजि तौर पर नहीं सुनेगी तो वे सार्वजनिक तौर पर बोलने को मजबूर हैं

 

समझिए कपिल सिब्बल का बयान 

बकौल सिब्बल- बिहार के चुनावों और दूसरे राज्यों के उप-चुनावों में कांग्रेस की प्रदर्शन पर अब तक शीर्ष नेतृत्व की राय तक सामने नहीं आई है. शायद उन्हें सब ठीक लग रहा है और इसे सामान्य घटना माना जा रहा है. पार्टी ने शायद हर चुनाव हारने को नियति मान लिया है.

 

कांग्रेस नेतृत्व को लेकर सिब्बल का सवाल 

कपिल सिब्बल ने एक बयान में कहा – पार्टी ने 6 सालों में आत्ममंथन नहीं किया तो अब इसकी उम्मीद कैसे कर सकते हैं? हमें कमजोरियां पता हैं, संगठन के स्तर पर समस्या की भी समझ है और शायद समाधान भी पता है, लेकिन इसे अपनाना नहीं चाहते. अगर यही हाल रहा तो पार्टी को आगे और भी नुकसान होता रहेगा

 

जाहिर है सिब्बल पहले भी गांधी परिवार वाले नेतृत्व पर सवाल उठाकर नेतृत्व बदलने की मांग करते रहे हैं हाल के बाद सिब्बल के बयान साफ संकेत दे रहे हैं कि कांग्रेस का एक खेमा नहीं चाहता कि गांधी परिवार से ही कोई अध्यक्ष बनें, लेकिन एक खेमा अब भी इस बात को मानता है कि बगैर गांधी परिवार कांग्रेस कुछ नहीं है उसी खेमे में एक नेता है नाम है अशोक गहलोत। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने सिब्बल के वार पर पांच-पांच ट्वीट वाला पलटवार किया और जो लिखा उसके मुताबिक हार जीत चलता रहता है…लिहाजा बिहार में मिली हार कांग्रेस नेतृत्व की गलती नहीं है

 

 

 

सिब्बल के वार पर गहलोत का पलटवार 

अशोक गहलोत ने सिब्बल के वार पर पलटवार किया और समझाया कि कैसे वो मीडिया में बातों को लाकर कांग्रेस का ही नुकसान कर रहे हैं। सीएम गहलोत के मुताबिक सिब्बल की बातें गलत है और जिस तरीके से बात पार्टी में रखने के बजाए वे मीडिया में रख रहे हैं उसका कोई मतलब नहीं है। गहलोत के मुताबिक पार्टी का आंतरिक मामला आतंरिक की रहना चाहिए। धड़ाधड़ ट्वीट कर गहलोत ने कहा – कांग्रेस ने कई बुरे दौर देखे हैं. साल 1969, 1977, 1989 और फिर 1996 में पार्टी बुरे दौर से गुजरी लेकिन पार्टी ने अपनी नीतियों, विचारधारा और नेतृत्व के विश्वास के दम पर जबरदस्त वापसी की. बुरे दौर में हर बार पार्टी और अच्छे से निखर कर सामने आई है. सोनिया गांधी के नेतृत्व में साल 2004 में यूपीए ने सरकार बनाई थी. इस बार की भी स्थिति से हम उबरेंगे.

 

कुल मिलाकर कांग्रेस में उठी बागवत की आग फिल्हाल चिंगारी का रूप है। लेकिन कब ये चिंगारी ज्वालामुखी बन जाए ये कोई नहीं जानता, कांग्रेस हार को लेकर मंथन कर रही है या करेगी इस पर आलाकमान की तरफ से वाकई बयान नहीं आया और यही बात सिब्बल को परेशान कर रही है

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