अब जम्मू एवं कश्मीर में हर कोई ले सकेगा जमीन, जारी हुई अधिसूचना

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(अक्षत सरोत्री)

जम्मू-कश्मीर का इतिहास से तो हर कोई बाक़िफ़ है। चाहे वो कबालियों का 1947 में हुआ हमला हो या फिर उसके बाद वो विवाद जो शायद ही दुनिया के सामने न आया हो। पहले ही जब महाराजा हरि सिंह ने जब कश्मीर को भारत गणराज्य में शामिल करने की घोषणा की तो भारत को आधा कश्मीर तो मिला लेकिन साथ धारा-370 भी भारत को विरासत में मिली जिसके तहत कश्मीर का अपना ही अलग कानून था अलग संविधान था। जैसे भारत में IPC था कश्मीर में RPC नाम का अनुछेद काम करता था। कुल मिला कर बात यह थी की भारत के सभी कानून जम्मू एवं कश्मीर में नहीं मान्य थे। बाहरी राज्य का व्यक्ति कश्मीर में नौकरी नहीं कर सकता न ही जमीन ले सकता था लेकिन वो दिन भी आया जब मोदी सरकार ने धारा 370 को राज्य से खत्म कर दिया। अब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए हटने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तरफ से अधिसूचना जारी हो गई है। इस अनुच्छेद की समाप्ति के बाद अब कोई भी भारतीय, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संपत्ति खरीद सकेगा। इसके साथ ही कोई भी आम भारतीय राज्य सरकार के विभिन्न पदों पर नौकरी भी कर सकेगा।

क्या किया गया बदलाब

भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 द्वारा दी गई शक्तियों के अभ्यास में, जम्मू और कश्मीर सिविल सेवा (विकेंद्रीकरण और भर्ती) अधिनियम, 2010 की धारा 15 के साथ पढ़ें, प्रशासन यहाँ जम्मू और कश्मीर अनुदान में निम्नलिखित संशोधन करता है डोमिसाइल सर्टिफिकेट (प्रक्रिया) नियम, 2020, “एक आधिकारिक अधिसूचना के तौर पर पढ़ा जाए। राष्ट्रपति का आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। जम्मू कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 35 ‘ए’ राज्य के लोगों की पहचान और उनके विशेष अधिकारों से संबंधित था। इस अनुच्छेद के समाप्त होते ही राज्य का विशेष दर्जा समाप्त हो गया है। अनुच्छेद 35 ए के खत्म होने से राज्य के स्थायी निवासियों की दोहरी नागरिकता खत्म हो जाएगी। अब वह भारत के नागरिक होंगे। इसके अलावा अब जम्मू कश्मीर के बाहर के लोग भी यहां पर संपत्ति खरीद सकेंगे।

क्या थे धारा-370 के कानून

जम्मू-कश्मीर का जिक्र आते ही धारा 370 और 35ए की बात आ जाती थी. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता मिली थी। वहीं, 35A जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल को ‘स्थायी निवासी’ परिभाषित करने और उन नागरिकों को विशेषाधिकार प्रदान करने का अधिकार देता था। यह भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर सरकार की सहमति से राष्ट्रपति के आदेश पर जोड़ा गया। राष्ट्रपति ने 14 मई 1954 को इस आदेश को जारी किया था। यह अनुच्छेद 370 का हिस्सा था।

अनुच्छेद 370 के क्या थे मायने?

अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार था, लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए थी। इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती थी। राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था। 1976 का शहरी भूमि कानून राज्य पर लागू नहीं है।

इस कानून से क्या होंगे फायदे?

1. फिलहाल जम्मू-कश्मीर में सर्किल रेट एक जनवरी से 31 दिसंबर से लागू होता है। अब नई व्यवस्था के तहत सर्किल रेट का बढ़ाना भी वित्तीय वर्ष पर होगा। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद राज्य के अंदर प्रॉपर्टी के रेट बढ़ेंगे और रियल इस्टेट बाजार में भी तेजी देखने को मिलेगी।

2. देश भर में कार्यरत बड़े बिल्डर भी अब राज्य में अपना व्यापार शुरू कर सकते हैं। गौड़ संस के डायरेक्टर मनोज गौड़ ने कहा कि इससे वहां के रियल इस्टेट बाजार में बड़ी कंपनियों को अपना व्यापार शुरू करने में मदद मिलेगी।

3. राज्य में बाहर के लोग भी कश्मीर में स्थायी तौर पर निवास कर सकेंगे। अभी सूबे में बाहरी लोगों को स्थायी तौर पर रहने का अधिकार नहीं था। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी काफी असर पड़ने की संभावना है।

4. इस कदम से सबसे ज्यादा फायदा यह होगा लोग अपनी इंडस्ट्री भी कश्मीर के अंदर लगा सकते हैं। जिससे आने बाले टेक्स से राज्य सरकारों फायदा होगा और उसी पैसे से राज्य का विकास हो पाएगा।

5. जन्नत में घर बनाने की इच्छा रखने बाले लोग अब केंद्र शासित प्रदेश में कोई भी व्यक्ति जमीन खरीद सकता है और वहां बस सकता है।

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