मां दुर्गा का छठा स्वरूप हैं कात्यायनी, मां की आराधना से शीघ्र होता है विवाह

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-नीलम रावत, संवाददाता

 

नवदुर्गा के छठवें स्वरूप में माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है. माँ कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था इसलिए इनको कात्यायनी कहा जाता है. ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी. विवाह सम्बन्धी मामलों के लिए इनकी पूजा अचूक होती है. योग्य और मनचाहा पति मां कात्यायनी की कृपा से प्राप्त होता है.

 

मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं. शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए.

 

कात्यायनी देवी का स्वरूप

 

दिव्य रुपा कात्यायनी देवी का शरीर सोने के समान चमकीला है

 

चार भुजा धारी मां कात्यायनी सिंह पर सवार हैं

 

अपने एक हाथ में तलवार और दूसरे में अपना प्रिय पुष्प कमल लिए हुए हैं

 

अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं

 

मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना से सभी संकटों का नाश होता है. मां कात्यायनी दानवों और पापियों का नाश करने वाली हैं. देवी कात्यायनी के पूजन से भक्त के भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है. मां कात्यायनी की भक्ति से मनुष्य को अर्थ, कर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.

 

महार्षि कात्यान ने मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने की इच्छा कर कठोर तपस्या की थी. महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्री का वरदान दिया. कुछ समय बीतने के बाद राक्षस महिषासुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया. तब त्रिदेवों के तेज से एक कन्या ने जन्म लिया और महिषासुर का वध कर दिया. कात्य गोत्र में जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ गया.

 

कैसे करें मां की पूजा ?

 

 

पीले या लाल वस्त्र धारण करके मां की पूजा करनी चाहिए

 

मां कात्यायिनी को पीले फूल अर्पित करें

 

मां को शहद अर्पित करना विशेष माना जाता है

 

माँ को सुगन्धित पुष्प अर्पित करने से शीघ्र विवाह के योग बनेंगे

 

अंत में मां के समक्ष उनके मंत्रों का जाप करें

 

नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है. इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है और अपने भक्तों को मां दुश्मनों का संहार करने में सक्षम बनाती हैं.

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