क्या हैं यह बायो बबल जिसने इस बार के IPL को संभव बनाया 

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-चंदन भारद्वाज

 

बायो बबल एक ब्लूटूथ ट्रैकर हैं जिसको खिलाड़ी हर वक्त अपने गले में पहने रहते हैं। इसे खिलाडी केवल उस वक्त उतारते हैं जब कोई भी खिलाडी मैच या प्रैक्टिस में हिस्सा ले रहे होते हैं। इसके माध्यम से प्रत्येक खिलाड़ी, टीम के सपोर्ट स्टाफ और खेल से जुड़े बाकी लोग जो भी आईपीएल के दौरान मौजूद होते हैं सभी की लोकेशन और मूवमेंट पर रियल टाइम नजर रखी जाती है. यह इनफार्मेशन सेंसर के माध्यम से मिलती हैं जो 13 होटल, 3 स्टेडियम, ट्रेनिंग ग्राउंड और खिलाड़ियों की बसों तक में लगाए गए हैं।

 

सरल भाषा में आपको समझाए तो सभी खिलाडियों का कोरोना टेस्ट होता है। टेस्ट के बाद रिपोर्ट्स आ जाने के बाद उन्हें बाकी दुनिया से अलग दुनिया दी जाती है। इस बार के आईपीएल में इस बायोबबल से निकलना मना है। अब इस बायो बबल का फयदा यह हैं की अगर सोशल डिस्टेंसिंग के नियम तोड़े जाते हैं या फिर कोई बायो बबल से बाहर निकलता है तो तुरंत ऐसा करने वाले के बारे में पता चल जाता है। नियम तोड़ने पर छह दिन के क्वारनटाइन या फिर निकाले जाने तक की सजा मिल सकती है. बीसीसीआई ने कोरोना के इस काल में खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने के लिए इस तकनीक के इस्तेमाल का फैसला किया था।

 

कुछ नई तकनीक और भी आ सकती हैं

 

बीसीसीआई के अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक के माध्यम से स्टेडियम में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सकेगा। तकनीक बनाने वाले ब्रिटिश टेक फर्म रेस्ट्राटा के चीफ एक्सीक्यूटिव ऑफिसर ओस्मान का कहना है कि वे लोग एक नई तकनीक विकसित कर रहे हैं जिसका इस्तेमाल करके कोरोना संक्रमण के बीच भी हजारों लोगों को स्टेडियम के भीतर लाया जा सकेगा। दर्शको को भी खिलाड़ियों की तरह ही ट्रैकर दिए जाएंगे और स्टेडियम में उनकी हरकतों पर नजर रखी जाएगी. सितंबर के महीने में कुछ देशो के रेस्टुरेंट में इसका एक पायलट प्रोजेक्ट भी तैयार किया था।

 

दरअसल इस तकनीक को क्रिकेट या कोविड के लिए तैयार नहीं किया गया था। यह तकनीक उन लोगो के काम के लिए बनायीं गयी थी जो बेहद हाई रिस्क वाली जगहों पर काम कर रहे हैं ताकि उन्हें सही और सटीक लोकेशन दिया जा सके।

 

बोटान ओस्मान कहते हैं “आतंकवाद, तूफान और इंडस्ट्रियल एक्सीडेंट जैसी चीजों से लोगों को बचाने के लिए हमने इस तकनीक को बनाया था। एक इंडस्ट्रियल एक्सीडेंट होने की स्थिति में तीन सवाल हमारे सामने होते हैं- वहां कितने लोग हैं, कितनों को बचा लिया गया है और कितने गायब है। इन सवालो का जवाब जितनी जल्दी मिलेगा उतनी ज़्यदा जानें बचाई जा सकेंगी। ”

 

ओस्मान कहते हैं कि महामारी के कारण हमारे सामने एक नयी चुनौती आयी वह है ह्यूमन कॉन्टैक्ट। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था तो लिहाजा हमें भी अपनी तकनीक को उन्नत बनाना पड़ा ताकि लोगों के बीच की दूरी का सटीकता से पता किया जा सके।

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