सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार थे अहमद पटेल, गांधी परिवार से करीबी और उनके सियासी सफर पर एक नजर

रवि श्रीवास्तव 

 

कांग्रेस के एक मजबूत स्तंभ कहे जाने वाले अहमद पटेल अब दुनिया से रुखसत हो गए हैं…उनके निधन पर सियासी दिग्गजों के दुख जताने का सिलसिला जारी है । खुद पीएम मोदी ने भी अहमद पटेल के निधन पर दुख व्यक्त किया। साथ ही राहुल गांधी ने अपने नेता को खोने का गम जाहिर किया। अहमद पटेल हमेशा अपने तेज दिमाग से गांधी परिवार को मजबूत करने के लिए जाने जाते रहेंगे। मौजूदा वक्त में कांग्रेस में उनका कद क्या था इसलिए एक लाइन में ऐसे समझिए कि वे पार्टी के फंड को संभालने के साथ-साथ सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार भी थे। उनका लंबा सियासी अनुभव हमेशा गांधी परिवार के काम आता था। अहमद पटेल तीन बार लोकसभा सांसद और पांच बार राज्यसभा सांसद रहे। खास बात ये रही कि उन्होंने अपना पहला चुनाव इंदिरा गांधी के कहने पर लड़ा। तबसे वे लगातार कांग्रेस में अपनी मजबूत पैठ के लिए जाने जाते रहें

 

 

‘इंदिरा युग’ से ‘सोनिया काल’ तक कांग्रेस के साथ थे अहमद पटेल

 

अमहद पटेल का सियासी कद और अनुभव कितना था। इसका अंदाजा ऐसे भी लगाया जा सकता है कि वे उन नेताओँ में शामिल हैं जिन्हें इंदिरा गांधी ने लॉंच किया। इंदिरा गांधी से मिले गुण और अपने अनुभव के आधार पर वे कई बार कांग्रेस के सकंटमोचन साबित हुए। सियासी पंडित उन्हें इंदिरा के जमाने से ही कांग्रेस का ट्रबलशूटर मानते हैं। शुरू से ही पटेल की गिनती कांग्रेस के सबसे ताकतवर नेताओं में होती थी, भले ही वे कभी सरकार का हिस्सा नहीं रहे लेकिन गांधी परिवार से पटेल की नजदीकियां इंदिरा के जमाने से थीं। 1977 में जब वे सिर्फ 28 साल के थे, तो इंदिरा गांधी ने उन्हें भरूच से चुनाव लड़वाया।

 

राजीव गांधी के कार्यकाल में कद बढ़ा और यूं सोनिया के सलाहकार बन गए

 

अहमद पटेल को सोनिया गांधी का सलाहकार इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि कई बार मुश्किल वक्त में कांग्रेस को पटेल की सलाह ने ही मुश्किलों से उबारा है। कहते हैं इंदिरा गांधी के बाद जब राजीव गांधी ने सत्ता संभाली उससे बहुत पहले ही इंदिरा ने बतौर गिफ्ट अहमद पटेल को राजीव को दे दिया था। अहमद पटेल का कद 1980 और 1984 के वक्त और बढ़ गया जब इंदिरा गांधी के बाद जिम्मेदारी संभालने के लिए राजीव गांधी को तैयार किया जा रहा था। तब अहमद पटेल राजीव गांधी के करीब आए।लंबे समय तक राजीव गांधी के साथ काम करने के बाद वे सोनिया के सबसे करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने लगे

 

बयानबाजी नहीं काम को देते थे तवज्जो

अहमद पटेल कांग्रेस को हमेशा मजबूत करने की जोर आजमाइश में लगे रहते थे। जिसका फायदा उन्हें मिलता था। कहते हैं अहमद पटेल का कद ऐसा था कि वे कभी भी सोनिया गांधी से वक्त लेकर मिलने नहीं जाया करते थे। वे उन नेताओँ में से थे जिनका गांधी परिवार से डायरेक्ट रिश्ता हुआ करता था। देर रात तक काम करना और किसी भी कांग्रेस कार्यकर्ता को किसी भी वक्त फोन कर कोई भी काम सौंप देना पटेल की आदतों में शामिल था। कहा जाता है कि वे एक मोबाइल फोन हमेशा फ्री रखते थे जिस पर सिर्फ 10 जनपथ से ही फोन आते थे। वे बहुत ही स्ट्रैटजिक तरीके से काम करते थे। वे हमेशा पार्टी में सलाह देते थे कि बयानबाजी की बजाय स्ट्रैटजी से काम हो। कुल मिलाकर अहमद पटेल गांधी परिवार का ही हिस्सा रहे हैं इसलिए जितना उन्होंने पार्टी और परिवार को दिया आज उतना ही उनके जाने का कम कांग्रेस में है

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