इस स्थान पर नहीं होती हनुमान की पूजा, बजरंगबली से नाराज है यहां के लोग

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-नीलम रावत, संवाददाता

कहते हैं हर किसी को उसकी गलती की सजा मिलती है, फिर चाहे वो छोटा हो या बड़ा. गलती, गलती होती है. उसकी छोटी य बड़ी गलती से कोई अभिप्राय नहीं होता है. लोग अगर गलती करते हैं तो भगवान उन्हें सजा देते हैं. लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां भगवान को उनकी गलती की सजा दी जाती है. पवनपुत्र हनुमान को उनकी गलती के कारण आजतक भी उत्तराखंड के इस गांव में नहीं पूजा जाता.

उत्तराखंड के चमोली जिले के गांव द्रोणागिरी में हनुमान जी की पूजा वर्जित है. एक ओर जहां पूरा देश हनुमान जी की भक्ति में डूबा रहता है. वही इस गांव के लोग हनुमान जी की पूजा अर्चना नहीं करते हैं. इतना ही नहीं यहां भगवान का कोई मंदिर भी नहीं है.

संजीवनी बूटी लेकर जाने से नाराज लोग

कहते हैं जब लक्ष्मण मूर्छित हुए थे तो उनको बचाने के लिए हनुमान संजीवनी बूटी लेने गए और उन्होंने द्रोणागिरी पर्वत का भी एक हिस्सा उठा लिया था और उस हिस्से को लेकर चले गए थे. यहां के लोगों की इस पर्वत से काफी आस्था जुड़ी हुई थी और इसी कारण आज भी वहां के लोग बजरंगबली की अराधना नहीं करते. ना सिर्फ बजरंगीबली बल्कि इस गांव की महिलाएं भी द्रोणागिरी पर्वत की पूजा नहीं करती और उससे पीछे भी एक कहानी जुड़ी हुई है.

महिलाएं नहीं करती पर्वत की पूजा

जब पवनपुत्र हनुमान संजीवनी बूटी लेने पहुंचे तो एक वृद्ध महिला ने उन्हें द्रोणागिरी पर्वत की जानकारी दी जब हनुमान द्रोणागिरी पर्वत लेकर चले गए तो नाराज गांववालों ने महिला का बाहिष्कार कर दिया और इसी कारण आज भी इस गांव के आराध्य देव पर्वत की विशेष पूजा पर लोग महिलाओं के हाथ का दिया नहीं रखते और न ही महिलाएं इस पूजा में भाग लेती हैं.

राक्षस कालनेमी का किया था वध

संजीवनी बूटी की खोज में इसी स्थान पर हनुमान ने कालनेमी राक्षस का भी वध किया था. कहा जाता है कि जब रावण को पता चला कि हनुमानजी संजीवनी बूटी के लिए द्रोणागिरी गए हैं तो उसने कालनेमी राक्षस को उनके पीछे भेज दिया. कालनेमी पवनपुत्र हनुमान को मारना चाहता था लेकिन इससे पहले हनुमान को कालनेमी के बारे में पता चल गया.

कालनेमी ने साधु का भेष धरकर पवनपुत्र हनुमान को छलने की कोशिश की लेकिन हनुमान ने कालनेमी को मार गिराया .जोशीमठ में जहां कालनेमी मारा गया था, वहां आज भी कीचड़ और जल लाल रंग का दिखता है.

यूं तो राम भक्त हनुमान को हर जगह पूजा जाता है. दूर-दूर तक उनकी मान्यताएं भी है लेकिन आज भी द्रोणागिरी गांव के लोग पवनपुत्र हनुमान से नाराज है. इस गांव में ना ही हनुमान को पूजा जाता है और ना ही उनकी कोई तस्वीर मौजूद है. इसके साथ ही जो लोग भी द्रोणागिरी पर्वत घूमने जाते हैं उन्हें अपने साथ हनुमान से जुड़ी चीजें ले जाने की इजाजत नहीं होती.

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