जानिए मंदिरों में क्यों की जाती है परिक्रमा, परिक्रमा करने से मिलता है क्या लाभ?

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-नीलम रावत, संवाददाता

हिंदू धर्म की कई परंपराएं सदियों से चली आ रही है. सदियों से लोग इन परंपराओं का पालन कर रहे हैं. इनमें से एक परंपरा है धार्मिक स्थलों की परिक्रमा की. अक्सर जब भी आप मंदिर जाते हैं तो वहां भगवान के दर्शन करने के बाद लोग उनकी परिक्रमा करते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आखिर लोग ऐसा क्यों करते हैं और परिक्रमा करने से क्या फायदा होता है. चलिए आज हम आपको बताते हैं आखिर क्यों की जाती है मंदिरों में परिक्रमा.

मंदिरों में क्यों की जाती है परिक्रमा ?

ऐसी मान्यता है कि मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करने से सारी सकारात्मक ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है और मन को शांति मिलती है. साथ ही यह भी मान्यता है कि नंगे पांव परिक्रमा करने से अधिक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार जब गणेश और कार्तिक के बीच संसार का चक्कर लगाने की प्रतिस्पर्धा चल रही थी तब गणेश जी ने अपनी चतुराई से पिता शिव और माता पार्वती के तीन चक्कर लगाए थे. इसी वजह से लोग भी पूजा के बाद संसार के निर्माता के चक्कर लगाते हैं. उनके अनुसार ऐसा करने से धन-समृद्धि होती हैं और जीवन में खुशियां बनी रहती हैं.

परिक्रमा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

  • परिक्रमा के दौरान कभी बुरे भावों को अपने मन में ना रहे
  • बहुत तेजी से या बहुत धीमी गति से परिक्रमा नहीं करनी चाहिए
  • परिक्रमा के दौरान सांसारिक विषयों से संबंधित बातें नहीं करनी चाहिए
  • पथ में पीछे की ओर लौटना, हंसी-मजाक करना या उच्च स्वर में नहीं बोलना चाहिए
  • परिक्रमा के दौरान अपने इष्ट देव के मंत्र का जाप करने से उसका शुभ फल मिलता है
  • हर परिक्रमा के बाद भगवान की प्रतिमा को प्रणाम जरूर करें
  • परिक्रमा के बाद भगवान को पीठ नहीं दिखानी चाहिए
  • भगवान गणपति 1 परिक्रमा, विष्णुजी 3 परिक्रमा, मां दुर्गा 6 और भगवान शिव आधी परिक्रमा से प्रसन्न हो जाते हैं

मंदिर में परिक्रमा करने की परंपरा पौराणिक समय से तो जुड़ी है. इसके साथ ही परिक्रमा करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी होता है. इसलिए जब भी आप किसी धार्मिक स्थल जाएं तो वहां परिक्रमा जरूर करें. परिक्रमा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उनका भी पालन जरूर करें.

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