कृष्णा जन्मभूमि मामला: कृष्णा जन्मस्थान ट्रस्ट ने किया विवादित संपत्ति पर दावा

Krishna Janmabhoomi Case
Krishna Janmabhoomi Case

मथुरा (Mathura) में कृष्णा जन्मभूमि सोसायटी (Krishna Janmabhoomi Society) और शाही ईदगाह कमेटी (Shahi Idgah Committee) के बीच चल रहे मामले (Krishna Janmabhoomi Case) के बीच गुरुवार को कृष्णा जन्मस्थान ट्रस्ट ने विवादित संपत्ति पर दावा पेश किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1997 में विवादित संपत्ति पर ट्रस्ट के दावे को मान्यता दी थी, इसलिए दोनों विवादित पक्षों के बीच समझौते का कोई आधार नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में यूपी हाईकोर्ट (UP Highcourt) के 1997 के आदेश को मथुरा कोर्ट के सामने रखा है।

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ईदगाह मस्जिद को हटाने की हुई थी मांग

17 मई को वकीलों और कानून के छात्रों द्वारा एक याचिका दायर कर शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह भगवान कृष्ण (Bhagwan Krishna) के जन्मस्थान पर बनाई गई थी। याचिका में आगे कहा गया है कि पूरी संपत्ति ट्रस्ट को सौंप दी जानी चाहिए। याचिका पर सुनवाई 31 मई को होगी।

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इस बीच, अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह ने भी लखनऊ उच्च न्यायालय में एक आवेदन प्रस्तुत किया है, जिसमें अपील की गई है कि कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह के विवाद के विभिन्न मामलों को एक मुकदमे में एकीकृत किया जाए।

अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह ने कहा कि 1996 में कृष्णा जन्मभूमि सोसायटी ने विवादित संपत्ति पर अपना हक जताते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 23 सितंबर, 1997 को उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि विवादित भूमि का मालिकाना हक कृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट का है न कि कृष्ण जन्मभूमि समाज का।

मथुरा शाही ईदगाह ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील तनवीर अहमद ने कहा कि 1968 के बाद से किसी भी स्थानीय या बाहरी व्यक्ति ने ईदगाह को लेकर कोई आपत्ति नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह केवल 2020 के बाद से है कि बाहरी लोगों ने अदालतों में विवाद के बाद लगातार विवाद खड़ा किया है।

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