उत्तर प्रदेश की उत्तम कानून व्यवस्था में एक पीड़िता का शव आधी रात को जला दिया, हाथरस की बेटी पर हुए अत्याचार पर पुलिस की बर्बरता नहीं तो क्या ?

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रवि श्रीवास्तव 

हाथरस में एक मां बिखलती रही.. पिता सिसकता रहा, भाई सदमे था लेकिन उत्तर प्रदेश की उत्तम पुलिस ने ऐसा कारनामा किया है, जिससे प्रदेश की सीएम तक की साख पर भी सवाल उठने लगे हैं। देशभर का हर न्याय पंसद यही कह रहा है कि ये अन्याय,अत्याचार और अमानवीयता की पराकाष्ठा हाथरस की गुड़िया का पुलिस ने जबरन अंतिम संस्कार कर दिया, मां-बाप बिलखते रहे, लेकिन पुलिस निर्दयी बन गई,पुलिस ने खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया, गुड़िया को इज्जत से विदा भी नहीं होने दिया,मां-बाप की चीखें और उनका बिलखना कलेजा चीर देता है। आखिर पुलिस को ये हक किसने दिया? किसको बचाने के लिए इतनी निर्लज्जता ? सत्ताधीशों के अहंकार के सामने अंग्रेजी शासन भी पनाह मांगता है। रात का घटनाक्रम और विचलित कर गया।

लॉ एंड आर्डर का हवाला देकर गुंडागर्दी

हिंदु रीति-रिवाज के तहत किसी की जान जाने के बाद उसके अंतिम संस्कार की एक विधि होती है। लेकिन उत्तर प्रदेश की उत्तम पुलिस पर आरोप है कि वो विधि भी पूरी नहीं करने दिया गया शाम ढलने के बाद शव को नहीं जलाया जाता। पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने इसका भी ख्याल नहीं किया।

जानकारी के मुताबिक हाथरस में हुई हैवानियत के मामले में लड़की की मौत के बाद शव को बीती रात पुलिस दिल्ली से हाथरस लेकर पहुंची. तभी पुलिसवालों का अमानवीय चेहरा भी सामने आया है. घरवालों की बिना सहमति और मौजूदगी के खुद पुलिसवालों ने उस लड़की का अंतिम संस्कार कर दिया.

आधी रात को जब पुलिसवाले एंबुलेंस में शव लेकर हाथरस में पीड़ित के गांव पहुंचे तो लोगों ने जमकर विरोध किया. वे लोग लगातार कहते रहे कि रात में अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. घरवाले भी गुहार लगाते रहे कि उनकी बेटी के शव को सुबह तक उनके साथ रहने दिया जाए। लेकिन पुलिस ने एक ना सुनी औऱ किया वही जो पुलिस को ठीक लगा

सवाल- जब वारदात के वक्त लॉ-एंड-ऑडर नहीं बिगड़ी तो क्या शव को जलाने से बिगड़ जाती है?

 

 

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