सरकारी बैंकों के निजीकरण की दिशा में बढ़त, अब देश में बचेंगे केवल 4 सरकारी बैंक !

 

– कशिश राजपूत

 

 

 

बजट 2021 में  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की घोषणा की | इसके अलावा एक इंश्योरेंस कंपनी का भी निजीकरण किया जाएगा | बजट घोषणा के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने ब्लूमबर्ग के साथ इंटरव्यू में सरकारी बैंकों के निजीकरण के फैसले का स्वागत किया
उन्होंने कहा कि ये तो महज शुरुआत है | आने वाले दिनों में देश में केवल चार से उससे भी कम पब्लिक सेक्टर बैंक होंगे |

 

 

पिछले साल 18 बैंकों को मर्जर प्रक्रिया के तहत 12 बैंक कर दिया गया। निजीकरण की खबरों के बीच रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य सतीश मराठे ने कहा कि देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उनका निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।

 

 

पिछले कई वर्षों के प्रयासों के बावजूद देश गरीब बना हुआ है और वित्तीय पहुंच को व्यापक बनाने के प्रयासों को सीमित सफलता मिली है। मराठे ने कहा कि 50 करोड़ लोग अभी भी औपचारिक फाइनैंशल सिस्टम से अछूते बने हुए हैं और आरबीआई के 2004 से वित्तीय समावेश के प्रयासों के बावजूद कोई बैंक या माइक्रो फाइनैंस इंस्टिट्यूट उन तक नहीं पहुंच सका है।

 

 

इतिहास पर नजर डालें तो 19 जुलाई 1969 को देश की तत्कालिन प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री इंदिरा गांधी ने 14 बड़े प्राइवेट बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था | इस फैसले से 80 फीसदी बैंकिंग एसेट पर सरकार का नियंत्रण हो गया | रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के इतिहास के तीसरे वॉल्यूम में राष्ट्रीयकरण के फैसले को 1991 के उदारीकरण के फैसले से भी ज्यादा महत्वपूर्ण और प्रभावी बताया गया |

 

 

 

 

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