यहां भगवान कार्तिक ने महादेव को समर्पित की थी हड्डियां, मंदिर में घंटी चढ़ाने की है परंपरा

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-नीलम रावत, संवाददाता

देवभूमि उत्तराखंड धर्म-अध्यात्म के क्षेत्र में सबसे खास माना जाता है. अनेक देवी देवताओं के प्रसिद्ध मंदिर यहां मौजूद है. इन्हीं में से एक मंदिर भगवान शिव और मां पार्वती के पुत्र कार्तिक का है. हिमालय की गोद में बसा भगवान कार्तिकेय का ये मंदिर अद्भुत है. उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर हिन्दुओं का एक पवित्र स्थल है.

उत्तर भारत में भगवान कार्तिक का प्रसिद्ध मंदिर

यह मंदिर समुद्र तल से 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. माना जाता है कि यह एक प्राचीन मंदिर है जिसका इतिहास 200 साल पुराना है.

भगवान कार्तिक की पूजा उत्तर भारत से अधिक दक्षिण भारत में भी की जाती है, जहां उन्हें कार्तिक मुरुगन स्वामी के नाम से जाना जाता है. लेकिन, उत्तर भारत में बसा भगवान कार्तिक के इस मंदिर में भी श्रद्धालु दूर दराज से आते हैं. दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालु तो इस मंदिर के अवश्य दर्शन करने आते हैं.

घंटी चढ़ाने की है परंपरा

इस मंदिर की घंटियों की आवाज लगभग 800 मीटर तक सुनी जा सकती हैं. मंदिर में घंटियां चढ़ाने का विधान है. जिस भक्त की मनोकामना पूरी होती है वो कार्तिक स्वामी के इस मंदिर में घंटी चढ़ाते हैं. हजारों घंटियां इस मंदिर में आपको नजर आएंगी.

 

मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को मुख्य सड़क से लगभग 80 सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है. यहां की शाम की आरती या संध्या आरती बेहद खास होती है.

शिव को समर्पित की थी हड्डियां

इस मंदिर से एक महत्वपूर्ण पौराणिक घटना भी जुड़ी है, माना जाता है कि कार्तिक ने इस जगह अपनी हड्डियां भगवान शिव को समर्पित की थी.

पौराणिक कहानी के अनुसार एक दिन भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्र गणेश और कार्तिक से कहा कि तुम में से जो ब्रम्हांड के सात चक्कर पहले लगाकर आएगा उसकी पूजा सभी देवी-देवताओं से पहले की जाएगी. कार्तिक ब्रम्हांड के साच चक्कर लगाने के लिए निकल गए, लेकिन दूसरी ओर गणेश ने भगवान शिव और माता पार्वती के चक्कर लगा लिए और कहा कि मेरे लिए तो आप दोनों ही संपूर्ण ब्रम्हांड हो.

भगवान शिव बाल गणेश से काफी खुश हुए और सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होने का सौभाग्य दिया लेकिन जब कार्तिक ब्रम्हांड का चक्कर लगाकर आए और उन्हें जब सब बातों का पता चला तो उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया और अपनी हड्डियां भगवान शिव को समर्पित कर दिया.

कार्तिक स्वामी मंदिर की यात्रा कई मायनों में आपके लिए खास हो सकती है। धार्मिक आस्था के अलावा यहां प्रकृति प्रेमी और रोमांच के शौकीन पर्यटक भी आ सकते हैं. ऊंचाई पर बसे होने के कारण कार्तिक स्वामी के इस मंदिर से आस पास का नजारा भी बेहद खूबसूरत नजर आता है.

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