भगवान शिव ने यहां तोड़ा था अपना त्रिशूल, खंडित त्रिशूल की आज भी होती है पूजा

Spread the love

-नीलम रावत, संवाददाता

भगवान शिव का आप जब भी ध्यान करते हैं तो त्रिशूल, डमरु और गले में शेषनाग की तस्वीर आपके सामने जरुर प्रकट हो जाती होगी. त्रिशूल भगवान शिव का वो अस्त्र है जिससे वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और दुष्टों को दंड भी देते हैं.
भारत में भगवान शिव का ऐसा मंदिर मौजूद है जहां उनके खंडित त्रिशूल की आज भी पूजा-अर्चना की जाती है. आमतौर पर खंडित प्रतिमा और अस्त्रों का पूजन नहीं किया जाता लेकिन महादेव के इस पवित्र धाम में श्रद्धालु दूर-दराज से आते हैं.

पटनीटॉप में महादेव का मंदिर

जम्मू से 120 किलोमीटर दूर पटनीटॉप के पास सुध महादेव का मंदिर स्थित है. इस मंदिर को शुद्ध महादेव भी कहा जाता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर एक विशाल त्रिशूल के तीन टुकड़े जमीन में गड़े हुए हैं जो कि पौराणिक कथाओं के अनुसार स्वयं भगवान शिव के हैं.
सुध महादेव का ये मंदिर लगभग 2800 साल पुराना है. निर्माण आज से लगभग 2800 वर्ष पूर्व बताया जाता है। जिसका पुनर्निर्माण लगभग एक शताब्दी पहले एक स्थानीय निवासी रामदास महाजन और उनके पुत्र ने करवाया था. इस मंदिर में एक प्राचीन शिवलिंग, नंदी और शिव परिवार की मूर्तियां भी मौजूद है.

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कहानी

माता पार्वती अपनी जन्मभूमि मानतलाई में अक्‍सर पूजा करने आया करती थीं. एक बार जब वह यहां पूजा-अर्चना करने आईं तो उनके पीछे-पीछे सुधांत नाम का राक्षस भी आ गया. वह भी शिव भक्त था और पूजा करने आया था. जैसे ही पूजा करने के बाद मां पार्वती ने अपनी आंखें खोली, तो राक्षस को देखकर उनकी चीख निकल गई.

मां पार्वती की आवाज सुनकर महादेव का लगा कि वो खतरे में है. महादेव ने अपना त्रिशूल मां पार्वती की दिशा में फेंक दिया. जो सुधांत राक्षस के सीने में जा कर लगा. तब महादेव को लगा कि उनसे बहुत बड़ी भूल हो गई.

मंदिर का नाम पड़ा सुध महादेव

इसके बाद भगवान शिव स्वंय उस जगह पर प्रकट हुए. महादेव ने सुधांत को जीवनदान देने की पेशकश की लेकिन सुधांत ने इनकार कर दिया. सुधांत अपने ईष्टदेव के हाथों प्राण गंवाकर मोक्ष प्राप्त करना चाहता था. जिसके बाद भगवान शिव ने उसकी बात मानते हुए उसे आशीर्वाद प्रदान किया. महादेव ने सुधांत को आशीर्वाद दिया कि आज से ये जगह तुम्हारे नाम यानि सुध महादेव के नाम से जानी जाएगी.

मंदिर में हैं त्रिशूल के टुकड़े

यह त्रिशूल मंदिर परिसर में खुले में गड़े हुए हैं और यहां आने वाले भक्त इनका भी जलाभिषेक करते है. मंदिर के बाहर ही पाप नाशनी बाउली है जिसमें पहाड़ों से 12 महीनों पानी आता रहता है. ऐसी मान्यता है कि इसमें नहाने से सारे पाप नष्ट हो जाते है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *