कोयल बनकर शनिदेव को श्रीकृष्ण ने दिए थे दर्शन, इस मंदिर में शनि देते हैं वरदान  

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-नीलम रावत, संवाददाता

शनिदेव का न्याय का देवता कहा जाता है. अक्सर लोग शनिदेव के दंड से डरते हैं. लेकिन भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जहां शनिदेव दंड नहीं बल्कि भक्तों को वरदान देते हैं.

उत्तर प्रदेश के मथुरा के कोसीकलां गांव के पास शनिदेव के एक और सिद्ध धाम है, जहां दर्शन मात्र से ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. मान्यता है कि यहां परिक्रमा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. जो भी भक्त यहां श्रद्धा और भक्ति के साथ शनिदेव के दर्शन करेगा उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे.

कोयल रूप में आए थे श्रीकृष्ण

मान्यता है कि द्वापरयुग में शनिदेव अपने आराध्य भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए नंदगांव आए थे. शनि को नंद बाबा ने रोक दिया, क्‍योंकि वे उनकी वक्र दृष्‍टि से भयभीत थे. तब दुखी शनि को सांत्‍वना देने के लिए कृष्‍ण ने संदेश दिया कि वे नंद गांव के निकट वन में उनकी तपस्‍या करें, वे वहीं दर्शन देने के लिए प्रकट होंगे. तब शनिदेव ने इस स्‍थान पर पर तपस्या की थी. उसके बाद भगवान श्री कृष्‍ण ने कोयल रूप में उन्‍हें दर्शन दिए थे. उसके बाद भगवान श्री कृष्ण की आज्ञा से वे कोकिलावन धाम में ही रहने लगे.

कोकिलावन धाम पड़ा इस स्थान का नाम

भगवान श्रीकृष्ण ने शनिदेव को वरदान दिए था कि जो भी व्यक्ति कोकिलावन का श्रद्धा और भक्ति के साथ परिक्रमा करेगा, उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे. इसी कारण इस स्थान का नाम कोकिलावन पड़ा. इस स्थान पर शनिदेव के बाईं ओर कृष्‍ण, राधा जी के साथ विराजमान हैं. भक्तगण यहां कोई भी परेशानी लेकर आए शनिदेव उनकी हर कष्ट और परेशानी को दूर कर देते हैं.

परिक्रमा का मिलता है लाभ

मान्यता है कि यहां आने वाले सभी लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है. इसी उम्मीद के साथ यहां शनिवार के दिन दूर-दूर से सैकड़ों भक्तगण अपनी फरियाद लेकर आते हैं और अपनी झोली भरकर जाते हैं. शनिवार के दिन यहां देश-विदेश से कृष्ण दर्शन को मथुरा आने वाले हजारों श्रद्धालु यहां आकर शनिदेव के दर्शन करते हैं, फिर कोकिलावन धाम की सवा कोसीय परिक्रमा करते हैं. उसके बाद सूर्यकुंड में स्नान कर शनिदेव की प्रतिमा पर तेल चढ़ाकर पूजा अर्चना की जाती है.

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