51 शक्तिपीठों में शामिल मां चिंतपूर्णी मंदिर, देशभर से मां के दर्शन करने आते हैं भक्त

MATA CHINTPURNI TEMPLE

 

– नीलम रावत

 

 

माता सती के 51 शक्तिपीठ देश के अलग अलग कोनो में मौजूद है। मां सती के इन 51 शक्तिपीठों के दर्शन करने से भक्तों की हर मुराद पूरी हो जाती है। हिमाचल में ही मौजूद है माता सती का एक और शक्तिपीठ जिसके दर्शन करने भक्त दूर-दूर से आते हैं।

 

हिमाचल प्रदेश के ऊना में मां चिंतपूर्णी का धाम मौजूद है। मां चिंतपूर्णी देवी जी का मंदिर 51 सिद्व पीठों में से एक है और मुख्य 7 में से एक है। मां चिंतपूर्णी देवी के दर्शनों के लिए भक्त पूरे भारत से आते है। नवरात्रि के त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में लोग दर्शनों के लिए मंदिर में आते हैं।

 

 

मंदिर से जुड़ी है कहानी-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने उनके पिता दक्ष द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण चक्कर लगा रहे थे इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें से सती की माथा इस स्थान पर गिरा था।

 

चारों दिशाओं में शिव मंदिर-

मां के इस मंदिर को चारों दिशाओं से रुद्र महादेव ने सुरक्षित कर रखा है। चारों दिशाओं मे भगवान शिव के मंदिर है कैलाश्वर महादेव मंदिर पूर्व दिशा में, नारायण महादेव मंदिर पश्चिम में, मचकण्ड महादेव उत्तर दिशा में और शिव बाड़ी मंदिर दक्षिण दिशा में स्थित है।

 

 

चिंतपूर्णी में माता पिण्डी रूप में विद्यमान है। मां की पिण्डी विविध् फूलों से सुसज्जित होती है और उस पर चांदी का छत्र शुशोभित है। चिंतपूर्णी माता का मन्दिर गुम्बदीय शैली में संगमरमर के पत्थरों से बना है। इसे मां के भक्तों ने बनाया है, गुंबद सोने का है और इस पर स्वर्णिम कलश और छत्र लगाए गए हैं।

 

मंदिर के पश्चिमी भाग में हनुमान जी का मंदिर है। मंदिर परिसर में एक बरगद का वृक्ष है जहां बच्‍चों का मुंड़न संस्‍कार किया जाता है। हर साल यहां तीन बार चिंतपूर्णी मेला लगता है जिन्‍हें हिंदू महीने के अनुसार, चैत्र, सावन और अषाढ़ में लगाया जाता है।

 

मान्यता है कि माईदास नामक भक्त ने इस स्थान की खोज की थी। पुराणों में कहा गया है कि जो भी भक्त इस स्थान पर आकर साधना करना है उसकी सारी चिंताएं समाप्त होती है। साथ ही किसी दूसरे स्थान से चार गुना फल मां के इस धाम में आकर भक्तों को प्राप्त होता है।

 

 

 

 

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