दुनियाभर में प्रसिद्ध महाकाल की भस्म आरती, जानिए भस्म से क्यों होती है आरती

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-नीलम रावत, संवाददाता

देश के कोने-कोने में महादेव के ज्योतिर्लिंग मौजूद है. शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है उज्जैन का प्रसिद्ध महाकालेश्वर धाम. जिनके दर्शन करने श्रद्धालु ना सिर्फ देश से बल्कि विदेशों से भी उज्जैन पहुंचते हैं.

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों को दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं. महाकालेश्वर मंदिर मुख्य रूप से तीन हिस्सों में विभाजित है. इसके ऊपरी हिस्से में नाग चंद्रेश्वर मंदिर है, नीचे ओंकारेश्वर मंदिर और सबसे नीचे जाकर आपको महाकाल मुख्य ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजित नजर आते हैं.

जहां आपको भगवान शिव के साथ ही गणेशजी, कार्तिकेय और माता पार्वती की मूर्तियों के भी दर्शन होते हैं. इसके साथ ही यहां एक कुंड भी है जिसमें स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं.

महाकाल के प्रकट होने से जुड़ी कहानी

मान्यताओं के अनुसार, उज्‍जैन में महाकाल के प्रकट होने से जुड़ी एक कथा है. दरअसल दूषण नामक असुर से लोगों की रक्षा के ल‌िए महाकाल यहां प्रकट हुए थे. फिर जब दूषण का वध करने के बाद भक्तों ने श‌िवजी से उज्‍जैन में ही वास करने की प्रार्थना की तो भगवान शिव महाकाल ज्योत‌िर्ल‌िंग के रूप में प्रकट हुए.

सबसे खास महाकाल की आरती

उज्जैन के इस महाकाल मंदिर की सबसे खास बात है यहां होने वाली भस्म आरती. जिसके दर्शन करने भक्त खासतौर पर इस मंदिर में आते हैं. दरअसल भगवान महाकाल की भस्म आरती के दुर्लभ पलों का साक्षी बनने का ऐसा सुनहरा अवसर और कहीं नहीं प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि जो इस आरती में शामिल हो जाए उसके सभी कष्ट दूर होते हैं, इसके बिना आपके दर्शन पूरे भी नहीं माने जाते हैं.

हर सुबह महाकाल की भस्म आरती करके उनका श्रृंगार होता है और उन्हें जगाया जाता है. इसके लिए कई सालों पहले शमशान से भस्म लाने की परंपरा थी. केवल उज्जैन में आपको यह आरती देखने का सुनहरा अवसर प्राप्त होता है.

भस्म आरती से जुड़ी मान्यता

दरअसल भस्म को सृष्टि का सार माना जाता है, इसलिए प्रभु हमेशा इसे धारण किए रहते हैं और इसलिए इस स्थान पर महादेव की आरती भस्म से की जाती है.यहां के नियमानुसार, महिलाओं को आरती के समय घूंघट करना पड़ता हैदरअसल महिलाएं इस आरती को नहीं देख सकती हैं. इसके साथ ही आरती के समय पुजारी भी मात्र एक धोती में आरती करते हैं.

महाकाल की भस्म आरती के पीछे एक यह मान्यता भी है कि भगवान शिवजी श्मशान के साधक हैं, इस कारण से भस्म को उनका श्रृंगार-आभूषण माना जाता है. इसके साथ ही ऐसी मान्यता है कि ज्योतिर्लिंग पर चढ़े भस्म को प्रसाद रूप में ग्रहण करने से रोग दोष से भी मुक्ति मिलती है.

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