MAKAR SAKRANTI: जानिए क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व

MAKAR SAKRANTI

 

 

-नीलम रावत

 

भारत त्योहारों का देश है. यहां हर सालों हजारों त्योहार मनाए जाते हैं। लेकिन साल की शुरूआत होती है मकर संक्रांति के त्योहार से। (MAKAR SAKRANTI) मकर संक्रांति का पर्व भारत में बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। मकर संक्रांति का पर्व दान-पुण्य का पर्व माना गया है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी का पर्व भी कहा जाता है. इस दिन खिचड़ी खाना और इसका दान करना श्रेष्ठ माना गया है। मकर संक्रांति के दिन कुछ जगहों पर पतंग उड़ाने का भी रिवाज है. मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के महत्व को भी बताता है। पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। धनु राशि से सूर्य मकर राशि में इस दिन प्रवेश करता है और इसी दिन से शुभ कार्यों की भी शुरूआत हो जाती है।

 

 

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मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

 

 

 

मकर संक्रांति (MAKAR SAKRANTI) पौष महीने का प्रमुख त्योहार है। इस दिन माघ महीने की शुरूआत होती है। इस साल मकर संक्रांति पर पूजा पाठ, स्नान और दान के लिए सुबह 8.30 बजे से शाम 5.46 तक शुभ मुहूर्त रहेगा।

 

मकर संक्रांति की पूजा विधि

इस दिन सुबह उठकर स्नान पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए।

अगर घर में स्नान कर रहे हैं तो उसमें गंगाजल की कुछ बूंदें मिला लें।

स्नान के बाद पूजा की शुरूआत करें।

सूर्य देव समेत सभी नव ग्रहों की पूजा करें।

इस पर्व पर खिचड़ी का सेवन करना भी उत्तम माना गया है।

इसके बाद जरूरतमंदों को दान दें, खिचड़ी का दान अवश्य करें।

 

 

इन बातों का रखें ध्यान

 

मकर संक्रांति पर मन में अच्छे विचार रखने चाहिए।

 

इस दिन किया गया दान कई गुना लाभ देता है।

 

मकर संक्रांति पर बुजुर्गों का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।

 

ऐसा करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।

 

इसके अलावा गर्म कपड़े, चावल, दूध दही और खिचड़ी का दान करना चाहिए।

 

इस त्योहार पर घर में तिल और गुड़ के लड्डू बनाए जाने की परंपरा है।

 

इसलिए इस दिन भोजन में भी तिल शामिल करने चाहिए।

 

पितरों की आत्मा की शांति के लिए जल में तिल अर्पण करना चाहिए।

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