सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकुर का बड़ा बयान, स्वतंत्र प्रेस और बोलने की आजादी पर पाबंदियों का दौर जारी

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रवि श्रीवास्तव

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने देश के मौजूदा हालत पर चिंता जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने एक कार्यक्रम में बड़ा बयान देते हुए कहा कि मौजूदा वक्त में प्रेस की आजादी  पर भी पांबदी लगाई जा रही है..उन्होंने कहा कि कानून के उपयोग और दुरुपयोग का एक घातक कॉकटेल बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है, ये खासकर उनके लिए है जो अपनी आवाज बुलंद करना जानते हैं। बता दें कि शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश राजद्रोह कानून, निषेधाज्ञा के कथित दुरुपयोग और इंटरनेट पर पूरी तरह रोक लगाने के आलोचक रहे हैं।

कौन है जस्टिस लोकुर ?

जस्टिस लोकुर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज रह चुके हैं, वे  उच्चतम न्यायालय के उन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल थे जिन्होंने 12 जनवरी 2018 को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ संवाददाता सम्मेलन कर विवाद पैदा कर दिया था।

‘डॉ.कफील खान के साथ गलत हुआ’

जस्टिस लोकुर ने डॉ. कफील खान के मामले का भी उदाहरण दिया। कहा, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत आरोप लगाते समय उनके भाषण और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उनके बयानों को गलत पढ़ा गया।

हाथरस कांड के प्रशासनिक रवैये पर सवाल 

दिसंबर 2018 में सेवानिवृत्त होने वाले पूर्व शीर्ष अदालत के न्यायाधीश ने आरोप लगाया कि सीआरपीसी की धारा 144 का उपयोग मीडिया को हाथरस गैंगरेप बलात्कार क्षेत्र से बाहर रखने के लिए किया गया, लेकिन एक इस दुर्व्यवहार का माध्यम प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन के अलावा कुछ भी नहीं था। न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा स्वतंत्र भाषण के लिए मौलिक अधिकार किसी भी सभ्य लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

 

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