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26 नवंबर को मुंबई पर हुए आतंकी हमले को 11 साल पूरे हो रहे हैं। आज पूरा देश मुंबई पर हुए 26/ 11 आतंकी हमले की ग्यारहवीं बरसी पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है और उन शहीदों को नमन कर रहा है जिन्होंने आतंकियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवा दी। बता दें कि मुंबई में वर्ष 2008 में 26 नवंबर को हुए आतंकवादी हमले में 26 विदेशी नागरिकों सहित 166 लोगों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों के साथ सुरक्षा बलों की मुठभेड़ करीब 60 घंटे तक चली थी। देश के इतिहास में 26/11 मुंबई हमला सबसे भयावह आतंकी हमला था जिसने सभी की रूह को कंपा दिया था।

हमलावर कराची से नाव के जरिए मुंबई में घुसे थे। लोकल मराठी मछुआरों को इन लोगों की आपाधापी को देखकर शक भी हुआ और उन्होंने पुलिस को जानकारी भी दी। लेकिन इलाक़े की पुलिस ने इस पर कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी और न ही आगे बड़े अधिकारियों या खुफिया बलों को जानकारी दी।

ये सभी आतंकवादी दो-दो के ग्रुप में बंट गए और अपनी-अपनी दिशा पकड़ ली। इनमें से दो आतंकियों ने दक्षिणी मुंबई के कोलाबा में स्थित लियोपोल्ड कैफे को निशाना बनाया, दो आतंकियों ने नरीमन हाउस, तो वहीं बाकी आतंकी दो-दो की टोली में छत्रपति शिवाजी टरमिनस, होटल ट्राइडेंट ओबरॉय और ताज होटल की तरफ बढ़ गए।

रात के तक़रीबन साढ़े 9 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर गोलीबारी की ख़बर मिली। मुंबई के इस रेलवे स्टेशन के मेन हॉल में दो हमलावर घुसे और अंधाधुंध फ़ायरिंग शुरू कर दी। इनमें एक मुहम्मद अजमल क़साब था जिसे अब फांसी दी जा चुकी है। दोनों के हाथ में एके47 राइफलें थीं और पंद्रह मिनट में ही उन्होंने 52 लोगों को मौत के घाट उतार दिया और 109 को ज़ख़्मी कर दिया।

आतंक का यह खेल सिर्फ छत्रपति शिवाजी टर्मिनस तक सीमित नहीं था। दक्षिणी मुंबई का लियोपोल्ड कैफे भी उन चंद जगहों में से एक था जो तीन दिन तक चले इस हमले के शुरुआती निशाने थे। यह मुंबई के नामचीन रेस्त्रांओं में से एक है, इसलिए वहां हुई गोलीबारी में मारे गए 10 लोगों में कई विदेशी भी शामिल थे जबकि बहुत से घायल भी हुए। 10:40 बजे विले पारले इलाके में एक टैक्सी को बम से उड़ाने की खबर मिली जिसमें ड्राइवर और एक यात्री मारा गया, तो इससे पंद्रह बीस मिनट पहले बोरीबंदर में इसी तरह के धमाके में एक टैक्सी ड्राइवर और दो यात्रियों की जानें जा चुकी थीं। तकरीबन 15 घायल भी हुए।

इस्माइल खान और अजमल कसाब नाम के दो आतंकवादियों ने सीएसटी यानि छत्रपति शिवाजी टरमिनस को निशाना बनाया। दोनो आतंकवादी पैसेंजर हॉल से अंदर घुसे और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में 58 लोग मारे गए जबकि 104 घायल हो गए। इस फायरिंग में आतंकियों ने 8 पुलिस अफसरों को मार गिराया। करीब 22:45 तक यह फायरिंग चली जिसके बाद दोनो आतंकी कामा अस्पताल की तरफ बढ़े,लेकिन मरीजों के वार्डों को पहले ही लॉक कर दिया गया।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर मुंबई एंटी टेरेरिस्ट स्केव्ड के हेमंत करकरे, विजय सालस्कर और अशोक काम्टे ने कमान संभाल ली और दोनो आतंकी अजमल कसाब और इस्माइल खान की तलाश में निकल पड़े। दोनो आतंकियों ने स्केव्ड की टीम को देख फायरिंग शुरू कर दी। दोनो तरफ से जोरदार फायरिंग हुई जिसमें हेमंत करकरे, विजय सालस्कर और अशोक काम्टे शहीद हो गए। ताज होटल में करीब 6 बम धमाके किए गए,पहली ही रात अग्निशमन के अधिकारियों ने करीब 200 बंदी लोगों को वहां से निकाला।

होटल ओबरॉय के ऑपरेशन को ही खत्म करने में तीन दिन लग गए। यह 28 नवंबर की दोपहर को समाप्त हुआ और उसी दिन शाम तक नरीमन हाउस को भी खाली करा दिया गया, लेकिन ताज होटल में चली मुठभेड़ 29 नवंबर की सुबह समाप्त हुई। इसमें 9 आतंकवादियों को मार गिराया गया जबकि अजमल कसाब नाम के एक आतंकी को जिंदा पकड़ लिया गया।

जम्मू-कश्मीर में सेना के ऑपरेशन ऑल आउट के मद्दे नजर बारामुला के सोपोर में सेना को बड़ी सफलता मिली है। यहां सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकी को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आतंकी का नाम दानिश चन्ना है। दानिश के पास से सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं और उससे पूछताछ जारी है।

इस मामले पुलिस के अधिकारी ने बताया कि सोपोर का रहने वाला दानिश चन्ना कुछ महीने पहले ही लश्कर-ए-ताईबा का हिस्सा बना था। उसने ही बीते माह बारामुला में बंद का उल्लंघन कर दुकान खोलने वाले सुनार की हत्या का प्रयास किया था। 

उन्होंने बताया कि दानिश चन्ना चार आतंकियों के एक गुट की अगुआई कर रहा था। इस गुट को बारामुला, सोपोर और पटटन के इलाके में पुलिसकर्मियों, एसपीओ और पंच-सरपंचों को निशाना बनाने का जिम्मा सरहद पार बैठे आतंकी सरगनाओं ने सौंपा था। दानिश चन्ना और उसके साथी बारामुला और सोपोर में कई व्यापारियों को भी उनके घर जाकर , अपने सभी कारोबार बंद रखने काफरमान सुना चुके हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को अमेरिका में एक बड़ा खुलासा किया जिससे पाकिसतान की सच्चाई पूरे विश्व के सामने आगई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अभी भी 30 से 40 हजार आतंकवादी मौजूद हैं। जो प्रशिक्षित हैं और अफगानिस्तान और कश्मीर के कुछ भागों में बसे हुए हैं। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सत्ता में आने से पहले सरकारों के पास "राजनीतिक इच्छा" नहीं थी कि वे अपनी धरती पर चल रहे आतंकवादी समूहों को खत्म कर सकें।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार खान ने कहा, "2014 में पाकिस्तानी तालिबान ने सैनिक स्कूल में 150 बच्चों की हत्या कर दी थी। सभी राजनीतिक दलों ने नेशनल एक्शन प्लान पर हस्ताक्षर किए और  उसने बाद हमने फैसला लिया कि पाकिस्तान में किसी भी आतंकी संगठन को संचालित नहीं होने देंगे।"

 

 

उन्होंने ये भी कहा, "जब तक हम सत्ता में नहीं आए थे, सरकार के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी। हमारी सरकार ऐसी पहली सरकार है जो आतंकी संगठनों को निरस्त्र कर रही है। ये पहली बार है जब ऐसा हो रहा है। हमने उनके संस्थानों और मदरसों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वहां हमारे प्रशासक हैं।"

इमरान खान ने ये भी कहा कि उनकी सीमा में 40 आतंकी संगठन संचालित थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछली सरकारें नियंत्रण में नहीं थीं और अमेरिका को जमीनी हकीकत नहीं बताई।

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग के अरवनी बिजबिहारा  के रहने वाले मुदस्सिर अहमद और उनकी पत्नी को आतंकियो ने अगवा कर लिया है। अगवा करने की वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है।

आपको बता दें की सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है।

 

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में 24 घंटे में दूसरी बार आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच एनकाउंटर शुरु हो गया है। सुरक्षाबलों ने वघामा इलाके में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों को मार गिराया। इस दौरान एक जवान भी शहीद हो गए हैं।

आपको बता दें कि सुरक्षाबलों की ओर से सर्च ऑपरेशन जारी है।

हमने पूरे इलाके को घेर रखा है। मंगलवार सुबह हमें दो से तीन आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी, तभी से ये ओपरेशन चलाया जा रहा है।

इससे पहले अनंतनाग में सोमवार को आतंकवादियों से मुठभेड़ में सेना के एक मेजर शहीद हुए थे और एक आतंकवादी को भी मार गिराया गया था। मुठभेड़ में एक मेजर समेत तीन सैनिक घायल हो गए थे।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि अनंतनाग के बिदूरा गांव मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गया था और उनके शव को बरामद कर लिया गया था।

राष्ट्रीय राइफल्स (RR) और राज्य पुलिसकर्मियों के विशेष अभियान समूह (SOG) ने आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना के बाद अचबल क्षेत्र के बिदूरा गांव की घेराबंदी की, जिसके बाद दोनों पक्षों में मुठभेड़ शुरू हो गई। मारे गए आतंकियों के शव को बरामद कर लिया गया है और उसकी पहचान की जा रही है।

जम्मू-कश्मीर में नाकाम होने के बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI अब नया जाल बिछा रही है और इस जाल को बिछाने लिए ISI ने भारत-नेपाल बॉर्डर को चुना है। सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ISI ने नेपाल में मौजूद लश्कर के स्लीपर सेल के कमांडर उमर मदनी को मॉड्यूल बनाने की जिम्मेदारी दी है।

उमर मदनी भारत-नेपाल बॉर्डर के तराई इलाके में मुस्लिम युवाओं का ब्रेनवाश करने में जुटा है। लश्कर ने अपने ऑपरेशन के लिए नेपाल के कपिलवस्तु में बेस बना रखा है। लश्कर कमांडर उमर मदनी नेपाल बॉर्डर एरिया से ब्रेनवाश किए युवाओं को पाकिस्तान भेजने की फिराक में है। खुफिया रिपोर्ट के बाद भारत नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा बलों को अलर्ट किया गया।

नेपाल के जरिये आतंकी घुसपैठ और आतंकी मॉड्यूल को पालने और पोसने का काम पाक ख़ुफ़िया एजेंसी लगातार करती रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नेपाल के मोरंग जिले में लश्कर का संदिग्ध मौलाना उमर मदनी, नया मॉड्यूल बनाकर भारत विरोधी गतिविधियों को फैलाने में लगा है। सूत्रों के के हवाले से पता चला कि लश्कर-ए-तौयबा से जुड़ा मौलाना मदनी "नेपाल एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी" के जरिये भारत विरोधी गतिविधियों को तेजी से फैला रहा है।

ख़ुफ़िया एजेंसी ने गृह मंत्रालय को दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत नेपाल के बॉर्डर से सटे कुछ नेपाल के जिलों में मौलाना उमर मदनी अपने NGO के जरिये विदेशों से फंड एकट्ठा कर रहा है। इस फंड का इस्तेमाल मदनी बॉर्डर एरिया के भोले भाले युवाओं का ब्रेनवाश कर लश्कर में शामिल करने के लिए कर रहा है। ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि कैसे नेपाल रूट से विदेशी पैसा नेपाल के NGO में आ रहा है और इस NGO का इस्तेमाल मदनी मुस्लिम युवाओं को लश्कर में शामिल करने के लिए कर रहा है।

आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के लिए 1751 किमी में खुली भारत-नेपाल की सीमा सबसे मुफ़ीद रही है। यही वजह है कि खूंखार आतंकी बाघा या अन्य बॉर्डर की बजाय इस रूट को ज्यादा तरजीह देते हैं।

 

दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में बुधवार को आतंकियों के हमले में CRPF के पांच जवान शहीद हो गए। आतंकियों ने CRPF की पेट्रोलिंग पार्टी पर पहले अंधाधुंध गोलियां बरसाईं फिर ग्रेनेड हमला किया। हमले में अनंतनाग के SHO भी गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद एक महिला को भी चोट पहुंची है। जवाबी कार्रवाई में एक पाकिस्तानी हमलावर आतंकी मारा गया। घटना की जिम्मेदारी आतंकी संगठन अल उमर मुजाहिदीन ने ली है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इसमें जैश-ए-मोहम्मद का हाथ है।

घटना व्यस्ततम खन्नाबल-पहलगाम रोड पर अनंतनाग बस स्टेशन से एक किलोमीटर दूर महिला कालेज के पास की है। बताते हैं कि मोटरसाइकिल सवार दो आतंकियों ने वहां पेट्रोलिंग पार्टी को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग की। इससे मौके पर ही एक जवान की मौत हो गई जबकि कुछ अन्य घायल हो गए। CRPF 116 बटालियन तथा पुलिस की संयुक्त पिकेट भी वहां तैनात रहती है। 

गोलियों की आवाज सुनकर SHO तथा डिवीजनल अफसर रक्षक वाहन से वहां पहुंचे तो आतंकियों ने दोनों गाड़ियों को निशाना बनाकर ग्रेनेड दागे। SHO की गाड़ी से टकराकर ग्रेनेड फट गया, जिसमें SHO अरशद खान घायल हो गए। डिवीजनल अफसर की गाड़ी को निशाना बनाकर दागा गया ग्रेनेड नहीं फटा। घटना के बाद एक आतंकी मौके से भाग निकला। 

सूत्रों के अनुसार, हमले में घायल जवानों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया जहां पांच ने दम तोड़ दिया। सूत्रों के अनुसार, हमले में एएसआई रमेश कुमार ( झज्जर, हरियाणा), निरोद शर्मा (नलबारी, असम), कांस्टेबल सत्येंद्र कुमार (मुजफ्फर नगर, उत्तर प्रदेश), महेश कुमार कुशवाहा (गाजीपुर, उत्तर प्रदेश) व संदीप यादव (देवास, मध्य प्रदेश) शहीद हो गए। घायलों में SRPF के हेड कांस्टेबल राजेंदर, कांस्टेबल प्रेमचंद्र कौशिक, कांस्टेबल केदार नाथ ओझा शामिल हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। SHO को गंभीर अवस्था में सेना के श्रीनगर स्थित 92 बेस अस्पताल में ले जाया गया है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है। इलाके में व्यापक पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

एक जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा के पहले अनंतनाग में हुए हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। इसी रास्ते से होकर अमरनाथ यात्री पहलगाम जाते हैं। इस वजह से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता अधिक है। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। नाके लगाकर जगह-जगह चेकिंग की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों की ओर से बस स्टैंड के आस-पास सुरक्षा बलों पर हमले का इनपुट पहले ही दिया गया था। 

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा महबूबा मुफ्ती ने हमले की कड़ी निंदा की है। दोनों ने शहीदों के परिवार के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि इस प्रकार के बर्बरतापूर्ण हमले की जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। 
 

14 फरवरी 2019 : दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा में CRPF की कानवाय पर फिदायीन हमला, 40 जवान शहीद।


30 मार्च 2019 : जम्मू संभाग के बनिहाल के पास जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर CPRF की कानवाय पर फिदायीन हमले की कोशिश, नुकसान नहीं।

 

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित केपी रोड पर आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया। इस दौरान मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गयी है। दोनों तरफ से भारी गोलीबारी जारी है। 


इस मुठभेड़ में अबतक एक आतंकी मारा गया है। वहीं सीआरपीएफ के 3 जवान भी शहीद हो गए हैं। गोलीबारी में अनंतनाग पुलिस के एसएचओ और सीआरपीएफ के तीन जवानों को भी गोली लगी है। जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के मॉड्यूल्स की तलाश में राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने बुधवार की सुबह तमिलनाडु के कोयंबटूर में सात जगहों पर छापेमारी की। ISIS मॉड्यूल के जिस सरगना की NIA को तलाश है, वह श्रीलंका हमले के कथित मास्टरमाइंड जहरान हाशिम से प्रभावित बताया जा रहा है और फेसबुक पर वह हाशिम का दोस्त भी है। NIA ने इस मामले में नया केस दर्ज किया है। 

NIA ने कोयंबटूर में सात जगहों पर छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि आतंकी संगठन ISIS के एक मॉड्यूल का सरगना हाशिम के साथ फेसबुक के जरिए संपर्क में रहता था और दोनों के बीच अक्सर बातचीत हुआ करती थी। इसी IS मॉड्यूल की NIA को तलाश है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि केरल में मौजूद इस्लामिक स्टेट के मॉड्यूल्स का श्रीलंका में हुए आतंकी हमले में हाथ हो सकता है। एजेंसिया इसी शक के आधार में जांच में जुटी है।

 

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। स्पेशल सेल ने जैश के आतंकी माजिद बाबा को गिरफ्तार कर लिया है। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी माजिद बाबा पर 2 लाख रुपये का ईनाम था। 

स्पेशल सेल की टीम को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अब्दुल मजीद बाबा की तलाश थी। आतंकी अब्दुल माजिद जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले का रहने वाला है। आतंकी पर 2 लाख रुपये का ईनाम रखा गया था। 

स्पेशल सेल की टीम ने उसे श्रीनगर से गिरफ्तार किया है। टीम ने उसे शनिवार की शाम को श्रीनगर के पीएस श्योरा इलाके से गिरफ्तार किया है। उसे अब सीजेएम श्रीनगर के सामने पेश किया जाएगा, यहां से उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जाएगा।

पाकिस्तान के लाहौर में बड़ा बम धमाका हुआ है। लाहौर के दाता दरबार के बाहर हुए धमाके में तीन लोगों के मारे जाने की खबर है। इस धमाके में 18 लोग जख्मी हो गए हैं। घायलों में अस्पताल में भर्ती कराया गया है जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। मरने वालों में दो एलीट फोर्स के जवान और एक नागरिक शामिल है। 

बताया जा रहा है कि हादसा दरबार के बाहर सड़क पर खड़ी एलीट फोर्स की गाड़ी के पास हुआ। अनुमान लगाया जा रहा है कि फोर्स की गाड़ी को निशाना बनाकर ये हमला किया गया है। पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंच गया है। ट्रेफिक को रोक दिया गया है और पूरे इलाके को घेरे में ले लिया गया है। 

धमाके के बाद मेव और जनरल अस्पताल इमरजेंसी जारी कर दी गई है। बड़ी तादाद में डॉक्टर अस्पताल में मौजूद हैं। 

शोपियां में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी। इस मुठभेड़ में तीन आतंकवादी के मरने की खबर सामने आई है। ये सभी आतंकवादी हिजबुल मुजाहिद्दीन से ताल्लुक रखता था। अभी आतंकवादियों के नाम का खुलासा नहीं हुआ है।

पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा बलों की जम्मू-कश्मीर के इन इलाकों पर पैनी नजर है। फरवरी में हुए फिदायीन हमले के बाद से लगातार ऑल आउट ऑपरेशन चल रहा है।

आपको बता दें कि 14 फरवरी को आदिल डार नाम के आतंकवादी ने सुरक्षा बलों के काफिले पर फिदायीन हमला किया था जिसमें 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे।

 

 

 

 

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में नक्सलियों ने बेरहमी दिखाया है। नक्सलियों ने यहां सड़क निर्माण में लगे 27 वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। घटना बीती रात की बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

नक्सलियों ने वाहनों में लगाई आग महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के कुरखेड़ा तहसील के राजापुर में सड़क निर्माण का काम चल रहा था। बीती रात भारी संख्या में पहुंचे नक्सली सड़क निर्माण में लगे वाहनों को आग के हवाले कर दिया। बीते कुछ दिनों से इलाके में नक्सली गतिविधियां तेज हो गई है।

अभी 2 दिन पहले भी नक्सलियों ने यहां पुलिस बल पर हमला कर दिया था। हालांकि इस हमले में पुलिस बल को कोई नुकसान नहीं हुआ था। वहीं मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए थे। आगजनी की घटना के बाद पुलिस बल को घटना स्थल के लिए रवाना किया गया है।

 

खूंखार आतंकी संगठन इसलामिक स्टेट इन इराक़ एंड अल-शाम का सरगना अबू बकर अल बग़दादी क्या जिंदा है? यह सवाल इसलिए उठ खड़ा हुआ है क्योंकि आईएसआईस की ओर से एक वीडियो जारी किया गया है जिसमें दिख रहे शख़्स के बग़दादी होने का दावा किया गया है। वीडियो में बग़दादी इसलामिक स्टेट को हुए नुक़सान का बदला लेने की बात कहता दिख रहा है।

2014 के बाद से बग़दादी को कहीं नहीं देखा गया था। इस वीडियो में बग़दादी इस बात को स्वीकार करता है कि आईएस का मज़बूत गढ़ उसके हाथ से निकल गया है। हालाँकि अभी यह साफ़ नहीं हो पाया है कि इस वीडियो को कब रिकॉर्ड किया गया है। यह वीडियो इसलामिक स्टेट के मीडिया नेटवर्क अल-फ़ुरक़ान की ओर से पोस्ट किया गया है। 

वीडियो में बग़दादी कह रहा है कि आतंकी संगठन आईएस के ख़ात्मे का बदला लेने के लिए ही श्रीलंका में ईस्टर संडे के मौक़े पर हमले किए गए। बग़दादी यह भी कहता है कि उसने बुर्किना फासो और माली में आतंकवादियों के साथ वफ़ादार रहने की प्रतिज्ञा की है। वीडियो में बग़दादी कहता है कि बग़ुज की लड़ाई ख़त्म हो चुकी है लेकिन इस लड़ाई के बाद भी बहुत कुछ होगा। बता दें कि बग़ुज आईएस का आख़िरी किला था। 

 

श्रीलंका में ईस्टर संडे पर हुए बम धमाकों के बाद से अभी तक शांति कायम नहीं हो रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार शनिवार को यहां सुरक्षा बलों के छापे के दौरान मास्टरमाइंड जहरान हाशिम के पिता और दो भाईयों की भी मौत हो गई है। जब सुरक्षा बल यहां पहुंचा तो उनकी संदिग्धों से मुठभेड़ हो गई। इसी दौरान तीन संदिग्ध लोगों ने विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया, जिसमें कम से कम 15 की मौत हो गई। मरने वालों में 6 बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।

इसी बीच 250 से अधिक लोगों की मौत के दोषी मास्टरमाइंड जहरान हाशिम की 26 साल की बहन मधानिया की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मधानिया और उसके पति को एक अधिकारी इन 15 मृतक लोगों की पहचान के लिए अस्पताल लेकर गए। इसी बीच मधानिया का कहना है, "कृपया उनसे कहिए कि मुझे तस्वीरें दिखा दें, मैं पहचान लूंगी। मैं जाकर देख नहीं सकती।"

जहरान वही है, जिसने 21 अप्रैल को शंगरी-ला होटल में खुद को उड़ा लिया था। मधानिया का एक अन्य भाई मोहम्मद जेयिन हाशिम भी अभी तक लापता है। जांचकर्ताओं का कहना है कि हो सकता है कि जेयिन ने भी खुद को उड़ा लिया है।  

शुक्रवार शाम को छापे के दौरान जिन लोगों की मौत हुई उनमें मधानिया के पिता, तीसरा भाई, उसकी पत्नी और दो बच्चे भी शामिल हैं। मृतकों में जेयिन की पत्नी और बच्चे समेत परिवार के कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं। मधानिया के पति का कहना है कि अधिकारी ने उन्हें जिन लोगों की तस्वीर दिखाई है, उनमें एक जहरान की पत्नी और उसके दो बच्चों में से एक हैं।

21 अप्रैल को चर्च और पांच सितारा होटलों में हुए धमाकों से तीन दिन पहले से इस परिवार के 16 लोग लापता थे। मधानिया का कहना है कि वह इस्लामिक स्टेट के बारे में कुछ नहीं जानती है, जिसने उसके भाई को कई अन्य लोगों की जान लेने के लिए प्रेरित किया है।

मधानिया का कहना है, "मैंने उससे तब से बात नहीं की जब से उसने अपने भाषणों में जहर उगलना शुरू किया। वह उग्र इस्लामी था। वह अपने टीनेज के दिनों से ही ऐसी बैठकों में शामिल होता था। लेकिन मैं तब से उससे दूर हूं, जब से उसने सरकार, राष्ट्रीय झंडे, चुनाव और अन्य धर्मों के खिलाफ प्रचार करना शुरू किया।" मधानिया का घर नेशनल तौहीद जमात से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित है।

मधानिया कहती है, "वो अन्य धर्मों को लेकर आक्रामक था, यहां तक कि सूफी और उदारवादी मुस्लिमों के प्रति भी। वह सूफी को नशा और धूम्रपान करने वाला कहता था। मेरे पति उससे दूर रहते थे, जब लगा कि वह गलत दिशा में जा रहा है। पुलिस पहले से ही उसकी निगरानी कर रही थी।" 

मधानिया का कहना है कि जहरान की दुनिया के प्रति नफसर का वो विरोध करती थी, इसलिए उसे और उसके पति को छोड़कर पूरा परिवार चला गया है। जहरान ने कक्षा छह में स्कूल छोड़ दिया था लेकिन इस्लाम में उसकी विशेष रुचि थी। उसने कुरान की पढ़ाई की और साल 2006 में अपना इस्लामिक अध्ययन सेंटर भी शुरू किया।

मधानिया कहती है, "उसने भगवान को खो दिया क्योंकि उसने गलत लोगों से हदीस सीखा, उसने लोगों को मारना सीखा। मैं कह सकती हूं कि मैं खुश हूं कि वो अब नहीं रहा।" मधानिया का कहना है कि जहरान की पहली विदेश यात्रा जापान की थी। वह तमिल मुस्लिमों को कुरान की शिक्षा देता था। वह केवल कुरान पढ़ता था, उसे बाकी सब पाप लगता था। 

श्रीलंका आतंकी हमले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद ने नए चेहरे से रूबरू करवाया है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान के टेरर हब से संचालित विभिन्न जेहादी गुट प्रशांत महासागर से अरब सागर तक के देशों में गहरी पैठ बना चुका है। ताईवान, फिलीपिन्स, मलेशिया, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, थाईलैंड,कंबोडिया, म्यांमार, श्रीलंका होते हुए सोमालिया तक इन जेहादी गुटों ने अपनी गतिविधियां बढा ली है। श्रीलंका हमले में रडार पर आए आतंकी संगठन नेशनल तौहिद जमात इन्हीं गुटों में एक है। इन देशों में सक्रिय यह संगठन आपसी तालमेल से काम कर रहा है। 

श्रीलंका के गृहराज्य मंत्री का मंगलवार को अपने संसद में दिया गया बयान इस बात की पुष्टि करता है। गृहराज्य मंत्री ने कहा है कि श्रीलंका का हमला दरअसल न्यूजीलैंड के मस्जिदों में कुछ महीने पहले हुए हमले का बदला है। भारतीय खुफिया एजेंसियां इन देशों को आतंकी गुटों की सक्रियता के बारे में लगातार चेतावनी देता रहा है। इसी के तहत श्रीलंका को कुछ दिनों पहले भी एन.टी.जे के बारे में बताया गया था। इन गुटों का खुलासा 2016 में पाकिस्तान समर्थन वाले गुट लश्कर-ए-तोयबा के आतंकियों से पूछताछ में हुआ था। उसके बाद खासतौर पर फिलीपिन्स, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया में हुए आतंकी धमाकों की जांच में कई चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ है।  

खुफिया विभाग के सूत्रों ने बताया कि इसी साल 27 जनवरी को फिलीपिन्स ने जोलो महागिरजाघर में हुए आतंकी हमले के तार इस क्षेत्र के कर्इ देशों से जुड़ता पाया गया है। यह गुट आईएसआईएस से भी खासे प्रभावित है। यह गुट आधुनिक सोच वाले इस्लामी देश मलेशिया में कट्टरवाद फैलाने की कोशिश में है। इसी तरह बौद्ध बहुल थाईलैंड के दक्षिणी क्षेत्र में आतंकी सक्रिय है। सूत्रों ने बताया कि यह संगठन अफगानिस्तान, सीरिया, पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों से संचालित हो रहे है। इनका मकसद इस क्षेत्र के बौद्ध और इसाई बहुल देशों में आतंक फैलाना है।

ईस्टर के मौके पर रविवार को हुए आठ बम धमाकों ने श्रीलंका को अंदर से हिला दिया है। पूरी दुनिया इन हमलों की कड़ी निंदा कर रही है। धमाके में करीब 290 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। मरने वालों में छह भारतीय नागरिक भी हैं। फिलहाल किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि शक के आधार पर 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि इन 24 लोगों को कोलंबो और उसके आसपास दो स्थानों से गिरफ्तार किया गया है।

इन हमलों के पीछे तौहिद जमात संगठन का नाम सामने आ रहा है। यह एक इस्लामिक संगठन है जिसका एक धड़ा भारत के तमिलनाडु में सक्रिय है। इसका नाम आतंकी घटनाओं से जुड़ता रहा है। इन हमलों से पहले श्रीलंका के मुख्य पुलिस अधिकारी ने चेतावनी दी थी कि देशभर के चर्चों को निशाना बनाया जा सकता है।

पुलिस मुखिया पूजुथ जयसुंद्रा ने 11 अप्रैल को श्रीलंका के वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी थी। अपने भेजे हुए अलर्ट में उन्होंने लिखा था, 'विदेशी खुफिया विभाग से जानकारी मिली है कि नेशनल तौहिद जमात नाम का संगठन आत्मघाती हमला करने की तैयारी कर रहा है।' रविवार को हुए हमले ठीक उसी तरह के हैं जिन्हें इस्लामिक संगठन अंजाम देता है।

श्रीलंका के पूर्वी प्रांत में श्रीलंका तौहिद जमात की मौजूदगी है जो महिलाओं के लिए शरिया कानून और मस्जिदों के निर्माण पर जोर देता है और सांप्रदायिक संदेशों को प्रसारित करता है। इन हमलों को जिस तरह से अंजाम दिया गया है कि वह 2016 में बांग्लादेश के ढाका में होली आर्टिसन बेकरी में हुए धमाके के समान है। इसे वहां के स्थानीय लड़कों ने अंजाम दिया था लेकिन उन्हें इस्लामिक स्टेट ने प्रशिक्षण दिया है।

हमलों को अंजाम देने के लिए ईस्टर के मौके को चुना गया जिससे कि यह साफ है कि उनका निशाना ईसाई धर्म के लोग ही थे। तौहिद का हाथ इन हमलों के पीछे है या नहीं यह अभी साफ नहीं है। जांच के बाद ही कुछ साफ हो पाएगा लेकिन यह संकेत है कि जिहादी आतंकवाद श्रीलंका में अपने पैर पसार रहा है। 

एसएलटीजे की गतिविधियों का बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने विरोध किया था जिसकी वजह से बौद्ध और मुस्लिमों के बीच तनाव बढ़ गया था। शुरुआती आंकलन से यह पता चला है कि हमलों को श्रीलंका के स्थानीय मुस्लिमों ने अंजाम दिया है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे बिना बाहरी शक्ति के समर्थन के अंजाम देना मुश्किल है।

श्रीलंका में रविवार को हुए आठ बम धमाकों से पड़ोसी देश दहल गया है। धमाकों में हुई मौतों का आंकड़ा 200 तक पहुंच गया है, जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हो गये हैं। मरने वालों में 35 विदेशी लोग भी शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका पुलिस ने इन बम धमाकों के बारे में दस दिन पहले ही राष्ट्र को सतर्क किया था कि आतंकवादी देश के प्रमुख चर्चों को निशाना बना सकता है। इस चेतावनी के तुरंत बाद सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई थी।

इसके अलावा कोलंबो में एक संदिग्ध आत्मघाती हमलावर के बारे में भी पुलिस सतर्क थी। पुलिस को विदेशी खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट किया था। इसमें कहा गया था कि एक विदेशी खुफिया एजेंसी ने जानकारी दी है कि नेशनल तोहिद जमात प्रमुख चर्चों और कोलंबो में स्थित भारतीय उच्चायोग को निशाना बनाते हुए आत्मघाती हमलों को अंजाम देने की योजना बना रहा है।

बता दें कि नेशनल तोहिद जमात श्रीलंका का कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन है जिसका जो पिछले साल ही प्रमुखता में आया था जब कई बौद्ध प्रतिमाओं के साथ बर्बरता करने में इस संगठन का नाम जोड़ा गया था। 

गौरतलब है कि रविवार सुबह सिलसिलेवार हुए आठ बम धमाकों ने श्रीलंका को हिला दिया है। कोलंबो में सेंट एंथनी चर्च, नौगोंबो में सेंट सेबेस्टियन चर्च और बट्टिकलोबा में एक चर्च को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा होटल शांग्री-ला, सिनामोन ग्रैंड और किंग्सबरी में भी धमाका हुआ है। इन धमाकों के बाद पूरे देश में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है और एहतियातन सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही देश में दो दिन का अवकाश घोषित कर दिया गया है। 

ईस्टर संडे के मौके पर श्रीलंका के चार चर्च समेत दो होटेलों में सीरियल ब्लास्ट हुआ है। इस ब्लास्ट में अब तक 156 लोगों की मौत हो गई है और 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। 

 

एक धमाका राजधानी कोलंबों के कोचचिकड़े में स्थित सेंट एंथोनी चर्च में हुआ है। वहीं दूसरा धमाका कटाना के कटुवापिटीया चर्च में हुआ। तीसरा धमाका नेगोंबो हुआ है।  पुलिस ने राजधानी के शंगरी-ला होटल और किंग्सबरी होटल में भी विस्फोट की सूचना दी है। 

 

#UPDATE AFP News Agency: At least 80 injured in Sri Lanka multiple blasts https://t.co/676UT97psH


जानकारी के अनुसार कोलंबो में सेना के 200 से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री ने आपात बैठक बुलाई है। इसी बीच श्रीलंका स्थित भारतीय दूतावास ने श्रीलंका में रहने वाले भारतीय नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर +94777903082 +94112422788 +94112422789 जारी किए हैं।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में गुरुवार को 15-20 बंदूकधारी ने बस में सवार यात्रियों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई है। मारने से पहले बंदूकधारियों ने सभी पीड़ितों को बस से नीचे उतार दिया था। प्रांतीय गृह सचिव हैदर अली ने बताया कि हमलावरों ने पैरामिलिट्री फ्रंटियर कॉर्प्स की वर्दी पहनी हुई थी।

उन्होंने कहा, 'बंदूकधारियों ने मकरान तटीय राजमार्ग पर बस को रोका और 14 लोगों की हत्या कर दी।' अली ने बताया कि वाहन तटीय शहर ओरमारा से कराची के बंदरगाह मेगासिटी जा रहे थे। अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

पाकिस्तानी अखबर डॉन के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक मोहसिन हसन बट्ट ने बताया कि 15-20 अज्ञात हमवावरों ने कराची और ग्वादर के बीच पांच-छह बसों को रोका। दोपहर साढ़े बारह और एक बजे के बीच बंदूकधारियों ने बस को रोका और 16 यात्रियों के पहचान पत्र देखकर उन्हें बस से नीचे उतार दिया।

स्थानीय अधिकारी जेहांगीर दाष्टी ने कहा कि बस से लगभग तीन दर्जन यात्री यात्रा कर रहे थे। बट्ट ने कहा कि यह सुनियोजित हमला था। पहचान पत्र के जरिए पीड़ितों की पहचान करके उन्हें काफी करीब से गोली मारी गई। जहां 14 लोगों की इस हमले में मौत हो गई वहीं दो यात्री भागकर जान बचाने में सफल रहे और लेवीस चेकपोस्ट पहुंच गए। उन्हें इलाज के लिए ओमारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गृह सचिव ने कहा कि मृतकों में एक नौसेनिक अधिकारी और तट रक्षक सदस्य भी शामिल था। लेवीस और अन्य सुरक्षाबल घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच कर रहे हैं। पीड़ितों के शव को नूर बक्श होटल से बरामद कर लिया गया है। इस घटना के पीछे के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। साथ ही पीड़ितों की पहचान होना बाकी है। अफगानिस्तान और ईरान की सीमा से लगा ब्लूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और गरीब प्रांत है।

 

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपने लॉन्च पैड नियंत्रण रेखा के पास नए ठिकानों पर सक्रिय कर दिया है। ताकि इस आतंकी संगठन से आतंकियों को जम्मू कश्मीर को भीतर आसानी से भेजा जा सके।

ये बात शीर्ष आतंकवाद रोधी अधिकारी और जम्मू एवं कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है। हालांकि उन्होंने बाद में ये भी कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय सुरक्षा बलों ने घाटी में अधिकांश जैश नेतृत्व को समाप्त कर दिया है।

उन्होंने कहा कि जैश का मुखिया मसूद अजहर के भतीजा मोहम्मद उमैर, जिसे फरवरी में पुलवामा में आत्मघाती हमले के दौरान देखा गया था, या तो मार दिया गया है या पाकिस्तान वापस चला गया है।

आतंक रोधी और पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, जैश के लॉन्च पैड के सक्रिय होने का एक कारण पाकिस्तान में जैश की ताकत और क्षमताओं में होने वाली वृद्धि भी है।

अधिकारियों ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बल घाटी में जैश नेतृत्व को समाप्त करने में सक्षम हो गए हैं। लेकिन केवल एक कमांडर, जो मुन्ना बिहारी कोडनेम के तहत काम करता है, वर्तमान में शोपियां जिले में सक्रिय है।

 इससे पहले भारतीय सुरक्षा बलों ने अजहर के बड़े भाई इब्राहिम अथर के बड़े बेटे उस्मान हैदर और बहनोई अब्दुल रशीद कामरान के बेटे ताल्हा रशीद को मार गिराया था। पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा बलों ने जैश के डिवीजनल कमांडर कामरान को भी 18 फरवरी को मार गिराया था।

जैश के रंग-ओ-नूर चैनल पर प्रसारित हुए एक ऑडियो क्लिप में इब्राहिम अथर ने ये संकेत दिया था कि मोहम्मद उमैर भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया है। इस ऑडियो क्लिप में अथर को ये कहते सुना जा सकता है, "उमैर और कामरान को पहले ही जन्नत नसीब हो गया हैं।"

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कई लॉन्च पैड लोलाब घाटी, कुपवाड़ा के उत्तर में, और श्रीनगर से लगभग 114 किमी उत्तर-पश्चिम में हैं। पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान ने अपने लॉन्च पैडों को नियंत्रण रेखा के पास से हटा लिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान को डर था कि 2016 जैसी सर्जिलकल स्ट्राइक कहीं दोबारा ना हो जाए।

भारत ने पुलवामा हमले के बाद आतंकी संगठन जैश के बालाकोट स्थित मुख्यालय पर हवाई हमला किया था। जिसके बाद इस आतंकी संगठन ने भारत में सुरक्षा बलों और निर्दोष लोगों को निशाना बनाने की धमकी दी थी।

अधिकारियों के मुताबिक संचार संकेतों से ये भी पता चला है कि जैश आने वाले महीनों में घाटी में हिंसा भड़काएगा।

                                                               

 

यूपी ATS ने सहारनपुर जिले से जैश के दो आतंकी गिरफ्तार किए हैं। इनमें एक आतंकी शाहनवाज अहमद तेली और आकिब मलिक को गिरफ्तार किया है। ये दोनों जम्मू-कश्मीर के रहने वाला है। दोनों के पास से एक- एक पिस्टल और कुछ कारतूस भी बरामद किए गए है। वहीं दोनों के मोबाइल फोन से जिहादी चैट, वीडियो और कुछ फोटो प्राप्त हुए हैं। फिलहाल टीम मोबाइल के चैट बॉक्स और वीडियो को खंगाल रही है। 

ताजा अपडेट यह मिल रहा है कि गिरफ्तार दोनों आतंकियों को सहारनपुर पुलिस लाइन से कोर्ट में पेश किया गया। वहां से दोनों आतंकियों को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ भेजा गया।एटीएस की टीम दोनों आतंकियों को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई है।

लखनऊ में डीजीपी ने प्रेस कॉन्प्रेंस में बताया कि कल मिली जानकारी के आधार पर दो संदिग्ध आतंकियों को सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया। दोनों जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन से जुड़े हुए हैं और यह दोनों कश्मीर के रहने वाले हैं। शहनवाज, कुलगम का और आकिब पुलवामा का निवासी है।

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड गाजी राशिद के खात्मे के बाद खुफिया एजेंसियों को आतंकी संगठन जैश-ऐ-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर के ठिकाने के बारे में पुख्ता सूचना मिली है। सूत्रों के मुताबिक, आतंकी मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर के आर्मी अस्पताल को अपना ठिकाना बनाया हुआ है। अज़हर के आस पास पाकिस्तानी सेना के जवानों को पहरा है। पाकिस्तानी सेना की सरपरस्ती में वह अस्पताल से ही भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों को अंजाम दे रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि अजहर इलाज के नाम पर बेहद सख्त सुरक्षा में अस्पताल के एक कमरे में कैद हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अस्पताल से अजहर ने पुलवामा में सुरक्षाबलों के काफिले पर आत्मघाती हमला करने का आदेश दिया था। हमले से करीब आठ दिन पहले जैश सरगना ने ऑडियो टेप जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि इस लड़ाई में मौत से ज्यादा अच्छा कुछ नहीं है। कोई इन्हें दहशतगर्द कहेगा, कोई निकम्मा, कोई पागल तो कोई इन्हें अमन के लिए खतरा कहेगा। इस टेप के जरिये ही अजहर ने गाज़ी राशिद को घाटी में युवाओं का ब्रेन वाश करने और उन्हें IED धमाके के साथ आत्मघाती हमलों के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। घाटी में आतंकियों के खिलाफ आर पार की लड़ाई में जुटे सुरक्षाबलों की कार्रवाई से डरे पाकिस्तान ने LOG के पास POK में लांच पैड से आतंकियों को हटाना शुरू कर दिया है।

घाटी में जैश-ए-मोहम्मद के करीब 60 से ज्यादा आतंकी मौजूद है, जो अलग-अलग जिले में फैले हुए है। ये आतंकी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है। इतना ही नहीं सीमा पार पाकिस्तानी सेना भी इन आतंकियों को बचाने में जुट गई है। LOC के पास पाक सेना अलर्ट पर है और वहां मौजूदा आतंकी ठिकानों को शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। खबरों के मुताबिक, इन शिविरों में आतंकियों की कोई हलचल देखने को नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं, पाक ने अपने सैनिकों को शीतकालीन बंकरों में तैनात कर दिया है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दम पर भारत समेत दुनिया भर को धमकाने वाला सरगना मौलाना मसूद अजहर दरअसल बहुत ही डरपोक किस्म का आदमी है। सिक्किम पुलिस के पूर्व महानिदेशक अविनाश मोहनाने का कहना है कि सेना के जवान के एक थप्पड़ में ही उसकी अकड़ ढीली पड़ गई थी और वह सारे राज़ उगलने लगा था।

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में फरवरी, 1994 में उसकी गिरफ्तारी की गई थी। उस दौरान मोहनाने ने उससे पूछताछ की थी। अज़हर पुर्तगाली पासपोर्ट पर बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसकर कश्मीर पहुंचा। अविनाश ने बताया कि हिरासत में खुफिया एजेंसियों को उससे पूछताछ करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी थी। सेना के जवान के एक थप्पड़ पर ही वह बुरी तरह से हिल गया था और बोलना शुरू कर दिया था। उसने पाकिस्तान में आतंकवादियों की भर्ती प्रक्रिया और आतंकी गुटों की गतिविधियों की जानकारी दी थी।

1985 बैच के IPS अधिकारी मोहनाने ने इंटेलीजेंस ब्यूरो में दो दशक के अपने कार्यकाल में अज़हर से कई बार पूछताछ की थी। उन्होंने उस वक्त IB में कश्मीर डेस्क का नेतृत्व किया था। उन्होंने बताया कि कई बार कोट बलवाल जेल में उससे कई घंटे तक पूछताछ की। हमें उस पर ज्यादा बल प्रयोग नहीं करना पड़ा क्योंकि वह खुद ही सारी सूचनाएं बताता चला गया। उसी ने अफगानी आतंकियों के घाटी में भेजे जाने की जानकारी दी थी। साथ ही हरकत उल मुजाहिदीन और हरकत उल जेहाद-ए-इस्लामी के हरकत उल अंसार में विलय की भी जानकारी दी थी। वह हरकत उल अंसार का सरगना था।

मोहनाने ने बताया कि बांग्लादेश से 1994 में भारत पहुंचने के बाद अजहर कश्मीर जाने से पहले सहारनपुर गया था। यहां उसने साझा नीति बनाने के लिए एचयूएम और हूजी के अलग-अलग धड़ों के साथ बैठक की थी ताकि दोनों घाटी में एक साथ आ सकें। अविनाश ने बताया कि कराची से प्रकाशित समाचार पत्र ‘सदा ए मुजाहिद’ में पत्रकार के तौर पर अजहर ने पाक के पत्रकारों के साथ 1993 में कुछ देशों की यात्रा की थी, जहां उसने ‘कश्मीर हित’ के लिए समर्थन मांगा था।

मोहनाने ने बताया कि अजहर हमेशा दावा करता था कि पुलिस उसे ज्यादा दिन तक हिरासत में नहीं रख पाएगी क्योंकि वह पाकिस्तान और आईएसआई के लिए महत्वपूर्ण है। फरवरी 1994 में गिरफ्तारी के 10 महीने बाद दिल्ली से कुछ विदेशी नागरिकों का अपहरण हो गया और अपहर्ताओं ने उसे रिहा करने की मांग की लेकिन उमर शेख की गिरफ्तारी के कारण यह साजिश नाकाम हो गई। हालांकि 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के यात्रियों के अपहरण के बदले उसे रिहा कर दिया गया।

धरती का जन्नत कही जाने वाली जम्मू-कश्मीर मानो आतंकी घटना थमने का नाम नहीं ले रही है। जबसे जम्मू में विधनासभा भंग हुई है, तबसे आतंकवादी हमला कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है।

मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच एक बार फिर मुठभेड़ हुई जिसमें 2 आतंकवादी ढेर हो गए और 1 जवान शहीद हो गया।

इसके अलावा पुलवामा में भी सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। ये मुठभेड़ त्राल के हाफू इलाके में चल रही है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है। दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी हो रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों ने इलाके में आतंकियों के लिए तलाशी अभियान चलाया था, इसी के बाद आतंकियों से मुठभेड़ शुरू हुई।

देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली माया नगरी मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले की आज 10वीं बरसी है। इस हमले में लश्कर ए तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई के कई इलाकों में हमला कर 166 लोग की हत्या दी थी।

मुंबई आतंकी हमले को बीते हुए भले ही 10 साल हो गए है, लेकिन कई लोग आज भी उस घटना को भुला नहीं पाए हैं। इ हमले में बहुतों ने अपने परिचितों, सगे संबंधियों, बेटे बेटियों, मां-बाप को खोया। जो मारे गए वो तो चले गए लेकिन जो जिंदा है उस घटना यादकर सिहर उठते हैं।

आतंकवादियों की गोलियों की तड़तड़ाहट उनके कानों में आज भी गूंजती है। उनके जेहन में हमले का सदमा अभी भी है। भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने दिलेरी से लड़ते हुए 9 आतंकियों ढेर कर दिया था, जबकि एक जीवित पकड़े गए अजमल कसाब को भारतीय अदालत से मौत की सजा मिलने के बाद फांसी पर चढ़ा दिया गया था।