इस झील में छिपा है करोड़ों का खजाना, नागराज स्वंय करते हैं इसकी रक्षा

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-नीलम रावत, संवाददाता

 

दुनियाभर में ऐसी कई जगहें हैं जहां लाखों-करोड़ों का खजाना छुपा हुआ है. लेकिन, भारत में एक ऐसी झील मौजूद है जहां करोड़ों का खजाना है. इसकी रक्षा कोई व्यक्ति नहीं करता बल्कि स्वंय नागराज इस झील की रक्षा करते हैं.

 

 

देवभूमि हिमाचल प्रदेश के मंडी से लगभग 70 किलोमीटर दूर कमरूनाग झील है. जहां झील के अंदर आप खजाना देख तो सकते हैं लेकिन आजतक कोई उस खजाने को झील से निकालने की हिम्मत नहीं कर पाया है. पुरातत्‍व विज्ञानियों के अनुसार इस झील में नजर आने वाला खजाना महाभारत काल का है. इस झील के किनारे कमरूनाग देवता का मंदिर भी है. यहां जुलाई के महीने में सराहनाहुली मेले का आयोजन करके नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

 

सदियों पुरानी चढ़ावे की परंपरा

 

मान्‍यता है कि कमरूनाग झील में सोना-चांदी और रुपये-पैसे चढ़ाने की यह परंपरा सदियों पुरानी है. जब भक्तों की मुरादें पूरी हो जाती है तो वे इस झील में सोने-चांदी का चढ़ावा चढ़ाते हैं. ऊपर से जब आप झील में देखेंगे तो आपको झील के अंदर सबकुछ साफ नजर आएगा. लेकिन कोई इस झील की सुरक्षा में तैनात नहीं है. मान्यता है कि स्वंय कमरूनाग देवता इसकी रक्षा करते हैं.

 

 

कहा जाता है कि एक बार एक आदमी ने झील से खजाने को चुराने की कोशिश की थी. लेकिन ऐसे करने में उसकी जान चली गई थी. पौराणिक मान्‍यता यह भी है कि झील में पड़ा खजाना पांडवों की संपत्ति है. जिसे उन्‍होंने कमरूनाग देवता को समर्पित कर दिया था.

 

 

अंग्रेज भी लौटे खाली हाथ

 

 

एक बार मंडी में अंग्रेज अधिकारी ने सोचा कि क्यों ना झील के खजाने का इस्तेमाल किया. उसने खजाने को निकालने के लिए स्थानीय लोगों से बात की. लेकिन स्थानीय लोगों ने खजना निकालने से इंकार कर दिया. कहा जाता है कि जैसे ही वह कमरूनाग के लिए निकला तो जोर की बारिश शुरू हो गई. जिसके चलते उस अंग्रेज अधिकारी को रास्‍ते में ही रुकना पड़ा. इस दौरान अधिकारी ने एक स्थानीय फल खाया जिससे उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. आखिरकार उसे रास्ते से वापस लौटना पड़ा.

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