तमिलनाडु में स्तिथ भगवान शिव एकलौता ऐसा मंदिर, जहां उनके नटराज रुप की होती है पूजा!

करिश्मा राय

 

पूरे भारत देश में भगवान शिव के कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी किसी न किसी खासियत के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां भगवान शिव को उनके नटराज रुप में पूजा जाता है. तमिलनाडु राज्य के चिदंबरम शहर में भगवान शिव का यह विशेष धार्मिक स्थान चिदंबरम मंदिर या नटराज मंदिर के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव ने यहीं पर आनंद नृत्य किया था. ग्रंथों के मुताबिक चिदंबरम मंदिर उन पांच पवित्र शिव मंदिरों में से एक है, जो प्राकृतिक के पांच महत्वपूर्ण तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है. चिदंबरम मंदिर दक्षिण भारत के पुराने मंदिरों में से एक है. इस मंदिर में कांसे से बनी कई मूर्तियां हैं. माना जाता है कि ये 10वीं-12वीं सदी के चोल काल की हैं.

 

 

मंदिर की खासियत

  • मंदिर में कुल नौ द्वार और नौ गोपुरम हैं, जो कि सात मंजिला है.
  • इन गोपुरों पर मूर्तियों और नृत्य की विभिन्न मुद्राएं देख सकते हैं
  • इनके नीचे 40 फीट ऊंचे, 5 फीट मोटे तांबे की पत्ती से जुड़े हुए पत्थर की चौखटें हैं.
  • मंदिर के शिखर के कलश सोने के हैं.
  • मंदिर के हर पत्थर और खंभे पर भरतनाट्यम नृत्य की मुद्राएं अंकित हैं.

 

 

बता दें कि नटराज शिव की मूर्ति की एक खासियत ये भी है कि नटराज आभूषणों से लदे हुए हैं, जिनकी छवि अनुपम है. यह मूर्ति भगवान शिव को भरतनाट्यम नृत्य के देवता के रूप में प्रस्तुत करती है. शिव के नटराज स्वरूप के नृत्य का स्वामी होने के कारण भरतनाट्यम के कलाकारों में भी इस जगह का खास महत्व है.

 

 

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

मंदिर से जुड़ी एक कथा के मुताबिक पहले यहां भगवान श्री गोविंद राजास्वामी रहते थे. एक बार शिवजी उन्हें शिवजी-पार्वती के बीच नृत्य प्रतिस्पर्धा का निर्णायक बनने को कहा. गोविंद राजास्वामी तैयार हो गए. काफी देर तक प्रतिस्पर्धा चलती रही. शिवजी विजयी होने की युक्ति जानने के लिए श्री गोविंद राजास्वामी के पास गए. उन्होंने एक पैर से उठाई मुद्रा में नृत्य करने का संकेत दिया. यह मुद्रा महिलाओं के लिए वर्जित थी. जैसे ही भगवान शिव इस मुद्रा में आए तो पार्वतीजी ने हार मान ली. इसके बाद शिवजी का नटराज स्वरूप यहां पर स्थापित हो गया.

 

 

गोविंदराज और पंदरीगावाल्ली का मंदिर भी चिदंबरम मंदिर के इसी भवन में स्थित है. मंदिर में एक बहुत ही खूबसूरत तालाब और नृत्य परिसर भी है. जहां हर साल नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर से कलाकार हिस्सा लेते हैं.

 

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