राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 स्वीकार नहीं, देश भर में हुए प्रदर्शन: सी.एन.भारती

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-प्रणय शर्मा, संवाददाता

केन्द्र सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को सभी हितधारको ने अस्वीकार कर दिया है। इसकी उद्घोषणा स्कूल टीचर्ज फैडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत मुखर्जी पश्चिम बंगाल, महासचिव सी.एन. भारती हरियाणा, संयुक्त महासचिव के.सी. हरीकृष्ण केरल, कोषाध्यक्ष प्रकाश मोहंती उड़ीसा, उपप्रधान के.राजेन्द्रन तामिलनाडू एवं उपप्रधान महावीर सिंह राजस्थान ने संयुक्त रूप से की।भारती ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 में अति केन्द्रीयकरण, निजीकरण, व्यापारीकरण, भगवाकरण, समता, समानता विरोधी, सामाजिक न्याय विरोधी एवं सरकार द्वारा सबको शिक्षित करने की जिम्मेवारी से पीछे हटने का ही मसौदा है, इसलिए इसको स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि भारत व दुनिया 21वीं सदी में जी रही है, जिसमें सभी क्षेत्रों मे नए-नए ज्ञान व तकनीक के भंडार खुल रहे हैं। सभी देश प्रगतिशील, वैज्ञानिक दृष्टि, समानता, मानवतावाद को आगे रखकर अपनी शिक्षा नीति बना रहे हैं, वहीं भारत जैसा बड़ा देश समाज को हजारों वर्ष पीछे के अंधविश्वास, काल्पनिक कहानियों में उलझाने की नीति बना रहा है। इसके साथ-साथ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की ताकत एवं संविधान के मुख्य बिंदु समाजवाद व धर्म निरपेक्षता को भी वर्तमान शिक्षा नीति में कोई स्थान न दिए जाने पर भी इस शिक्षा नीति को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस विरोध कार्यवाही को जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी एवं जैसलमेर से लेकर त्रिपुरा तक आयोजित किया गया। बड़े खेद व निंदा का विषय है कि शिक्षक दिवस के अवसर पर भी दिल्ली व त्रिपुरा में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले अध्यापकों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया। इसे लोकतंत्र, विचारों की अभिव्यक्ति एवं संवैधानिक अधिकारों की हत्या नहीं माना जाएगा तो और क्या माना जाएगा।

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