तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री से मिल सकते हैं चीनी विदेशमंत्री, SCO की बैठक के दौरान हो सकती है गहन चर्चा

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रवि श्रीवास्तव

LAC पर चल रहे विवाद के बीच आज का दिन बेहद अहम रहने वाला है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ रूस मेंं चल रहे SCO समिट के दौरान मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि लद्दाख में भारतीय सेना और PLA के बीच चल रहे गरतिरोध के मद्देनजर ये चर्चा अहम रहने वाली है ..कयास लगाए जा रहे हैं इस दोनों देश के नेताओँ के बीच सीमा विवाद पर भी चर्चा हो सकती है । विदेश मंत्री इस मामले में डिप्लोमेट तरीके से सुलझाने की कोशिश करेंगे

भारतीय सेना ने कई अहम पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है. ऐसे में चीन की बौखलाहट साफ नजर आ रही है. वो लगातार आगे बढ़ने की फिराक में है। भारतीय सेना सरहद पर हर माकूल जवाब देने को तैयार है । भारतीय विदेश मंत्री चीन के विदेश मंत्री को किस तरह का जवाब देंगे इस पर भी नजरें होंगी। फिल्हाल विदेश मंत्री एस.जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन यानि SCO की बैठक में शामिल हुए रूस गए हैं.. विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए विदेश मंंत्री एस जयशंकर रूस के चार दिनों के दौरे पर हैं.

रक्षा मंत्री चीन से कर चुके हैं बात
तनाव के बीच रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पहले ही चीनी रक्षा मंत्री से बात कर चुके हैंं…चीन की ही मांग पर दोनों देशों के बीच बैठक हुई । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष जनरल वेई फेंगही के साथ यहां दो घंटे से अधिक समय तक बैठक की थी। जिसमें भारत ने ये साफ कर दिया था। कि विस्तारवाद की नीति के सात शांति संभव नहीं है। खबर के मुताबिक राजनाथ सिंह ने दो टूक कहा था कि पहले चीन लद्दाख में तनाव को कम करने पर जोर दे। अपनी सेना को संयम सिखाए उसके बाद ही दोनों देशों के रिश्तें बेहतर हो सकते हैं.। खास बात ये है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुए बैठक के बाद भी चीन सुधरा नहीं और सीमा पर उसकी हिमाकत बरकरार रही

SCO को समझिए जहां बैठक हो रही है
एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में एक शिखर सम्मेलन में रूस, चीन, किर्गिज़ गणराज्य, कज़ाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान द्वारा की गई थी.इसमें भारत और पाकिस्तान को 2005 में समूह के पर्यवेक्षकों के रूप में स्‍वीकार किया गया था. बाद में 2017 में दोनों देशों को ब्लॉक के पूर्ण सदस्यों के रूप में स्‍वीकृति दी गई।15 जून, 2001 को यहां शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) बनाने का ऐलान किया गया. तब इसमें 6 देश थे- किर्गिस्तान, कज़ाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान. 2017 में इसमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल हो गए. अब आठ देश इसके स्थायी सदस्य हैं

 

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