नेपाल के नए पीएम ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ, भारत के साथ मजबूत करेंगे दोस्ती-देउबा

 

केपी ओली शर्मा की कुर्सी जाते ही नेपाल की राजनीति बदल गई है. नेपाल के नए पीएम शेर बहादुर देउबा ने भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। नेपाल के पीएम का कहना है की वो भारत के साथ मतभेदों को खत्म करके वो एक नई शुरुआत करेंगे.

 

नेपाल की राजनिति में अब बदलाव आने लगा है.भारत विरोधी और चीन के इशारों पर नाचने वाले केपीओली शर्मा की नेपाल से छुट्टी हो चुकी है. वहीं सत्ता पर आए नए प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने भारत के साथ अच्छे संबंधों के संकेत दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा के उपर दवाब था की वो सदन में बहुमत साबित करें. मगर उन्होंने अपनी राजनीतिक समझ का फायदा उठाकर एसा कर दिखाया। और केपी ओली की रणनीति को सबसे बड़ा झटका दिया.

 

इस बीच नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा ने कहा है की वो भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं और इसके लिए पीएम मोदी के साथ मिलकर काम करेंगे. दोनो देशों को पुराने विवादों को भूलकर आगे बढ़ना होगा. नेपाल के काफी लोग भारत में और भारत के कई लोग नेपाल में रहते हैं इसलिए दोनों देशों को मिलकर काम करना होगा.

 

दरअसल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से फोन पर बात की और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं. पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा
ट्वीट.

 

हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई समेत भारत-नेपाल के बीच विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे.

 

पीएम मोदी के  संदेश के बाद शेर बहादुर देउबा का बयान सामने आया. जिसमें उन्होंने पीएम मोदी का धन्याबाद दिया औऱ साथ में मिलकर काम करने की बात कही। देउबा 75 साल के हैं. उन्हें भारत समर्थक नेपाली नेताओं में गिना जाता है. नेपाल में संवैधानिक और राजनीतिक संकट के मद्देनजर वहां की सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त करने का निर्देश दिया था. इसके बाद 13 जुलाई को राष्ट्रपति ने उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई थी.

 

देउबा ने 18 जुलाई को संसद में 83 के मुकाबले 165 मतों से विश्वास मत भी जीत लिया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार रात ही उन्हें बधाई संदेश भेजा, जिसका उन्होंने तुरंत जवाब दिया. गौरतलब है कि वामपंथी गठबंधन सरकार के प्रमुख रहे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ‘ओली’ के कार्यकाल में भारत-नेपाल संबंध तनावपूर्ण रहे हैं. दोनों देशों में सीमा विवाद, नक्शा विवाद, सीमा पर सुरक्षाबलों के बीच छुटपुट झड़पें तक इस दौरान हुईं.

 

सबसे ज्यादा केपीओली अपने बयानो को लेकर चर्चा में आए थे. जब उन्होंने भगवान राम को नेपाली और आयोध्या को नेपाल में बता दिया था. इतनी ही नहीं कोरोना को लेकर भी केपीओली शर्मा काफी विवादित बयान देते रहें है और एक बार तो कोरोना वायरस को भारतीय वायरस बोल के दोनों देशो के रिश्तों में और तनाव ला दिया था. मगर नेपाल की सत्ता पर काबिज हुए शेर बहादुर देउवा के बाद एसा लगता है की भारत और नेपाल के बीच रिश्ते पटरी पर लौट आएंगे.

 

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