पाकिस्तान को डर कहीं कश्मीर में विदेशी राजनयिकों के दौरे से खुल न जाए उसकी पोल

diplomats visiting Kashmir

 

-अक्षत सरोत्री

 

1947 में जब से कश्मीर का विलय भारत में हुआ है तब पाकिस्तान हर मंच पर कश्मीर का राग अलापता रहता है। जब भी भारत कश्मीर में कुछ (diplomats visiting Kashmir) भी अच्छा करने के लिए कोई कदम उठाता है तो पाकिस्तान अपने घड़ियाली आँशु बहाना शुरू कर देता है। पाकिस्तान कश्मीर की जनता को भड़काने के लिए अक्सर यह कोशिश करता है कि कश्मीर के लोग पाकिस्तान का समर्थन करें उसके लिए आतंक का सहारा तो पहले ही लेता रहता है। अब भारत द्वारा विदेशी राजनयिकों के दौरे करवाने से पाकिस्तान काफी परेशान चल रहा है उसे डर है कि कहीं उसकी कश्मीर को अशांत करने की पोल खुल न जाए।

 

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पाकिस्‍तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने भारत पर खड़े किये सवाल

 

 

पाकिस्‍तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता (diplomats visiting Kashmir) ने कहा कि यह दुनिया को ‘भ्रमित करने के भारत के प्रयासों का हिस्‍सा है।’ आतंकियों को भेजकर कश्‍मीर में खून बहा रहे पाकिस्‍तान ने दावा किया कि भारत इसके जरिए दुनिया का ध्‍यान बंटाना चाहता है। पाकिस्‍तान ने कहा कि अगर विदेशी राजनयिकों को हुर्रियत नेताओं से मिलने दिया जाए तो असली तस्‍वीर सामने आएगी। उन्‍होंने कहा क‍ि भारत यह झूठा माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है कि कश्‍मीर में हालात सामान्‍य हो गए हैं। पाकिस्‍तान ने दुनिया से मांग की कि वह भारत को कश्‍मीर मुद्दे को संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रस्‍तावों के अनुसार सुलझाने के लिए अनुरोध करें।

 

 

अनुच्छेद 370 हटने पर भी काफी रोया था पाकिस्तान

 

 

बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के लगभग डेढ़ साल बाद (diplomats visiting Kashmir) एकबार फिर भारत सरकार विदेशी राजनयिकों के प्रतिनिधमंडल को केंद्रशासित प्रदेश के दौरे पर ले जाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार इसबार जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में खाड़ी और यूरोपीय देशों के राजनयिक शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि इस दौरे में विदेशी राजनियक हाल ही में निर्वाचित हुए डिस्ट्रिक्ट डिवेलपमेंट काउंसिल (डीडीसी) के कुछ प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे।

 

तीसरी बार जा रहा है कश्मीर प्रतिनिधिमंडल

 

गत 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद से घाटी के दौरे पर (diplomats visiting Kashmir) जाने वाला यह तीसरा प्रतिनिधिमंडल होगा। इससे पहले अक्टूबर 2019 में यूरोपियन संसद के 27 सदस्यों का एक डेलिगेशन एक निजी थिंक टैंक के बुलावे पर कश्मीर गया था, 2020 की शुरुआत में भी विदेशी राजनयिकों का डेलिगेशन राज्य के दौरे पर गया था। यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब पाक आर्मी चीफ कमर बाजवा ने हाल ही में कहा है कि पाकिस्तान हर दिशा में शांति के लिए हाथ बढ़ाना चाहता है।

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