-नीलम रावत, संवाददाता

संसार का नियम है कि जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी निश्चित है. लेकिन उसके बावजूद भी लोग यमराज के नाम से डरते है. कोई भी अपने मुंह से यमराज का नाम नहीं लेना चाहता. हिमाचल प्रदेश के भरमौर में यमराज का एक ऐसा मंदिर है जहां जाने से आज भी लोगों को डर लगता है.

यमराज का यह मंदिर देखने में बिलकुल एक मकान जैसा है. मंदिर देखने में काफी छोटा है लेकिन जिसकी ख्याति दूर-दराज तक है. लोग मंदिर के बाहर से ही हाथ जोड़कर चले जाते है लेकिन, मंदिर के अंदर जाने की हिम्मत नहीं करते.

मंदिर के अंदर यमराज और चित्रगुप्त के कमरे

मान्यता है कि इस जगह पर यमराज लोगों के कर्मों का फैसला करते है. इस मंदिर में ना सिर्फ यमराज का कमरा मौजूद है, बल्कि चित्रगुप्त का कमरा भी है. चित्रगुप्त लोगों के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते है.

यमराज की अदालत

मंदिर से मान्यता जुड़ी है कि जब किसी की मृत्यु होती है, तब यमराज के दूत उस व्यक्ति की आत्मा को पकड़कर सबसे पहले इस मंदिर में चित्रगुप्त के सामने लाते हैं. चित्रगुप्त व्यक्ति को उसके कर्मों का हिसाब बताते हैं और उसके बाद यमराज दूसरे कमरे में व्यक्ति के कर्मों पर अपना फैसला सुनाते हैं.

चार अदृश्य दरवाजे

मंदिर को लेकर एक मान्यता ये भी है कि यहा चार अद्श्य दरवाजे हैं. जो सोने, चांदी, तांबे, और लौहे से बने हुए हैं. यमराज के फैसले के बाद यमदूत आत्मा को कर्मों के हिसाब से इन्हीं दरवाजे से स्वर्ग या नर्क लेकर जाते हैं. गरुड़ पुराण में भी यमराज के दरबार में चार दिशाओं में चार द्वार का उल्लेख मिलता है.

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