पीएम किसान योजना: 1364 करोड़ चला गया गलत खातों में, आरटीआई से हुआ खुलासा

PM Kisan Yojana

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

भारत सरकार द्वारा चलाई गई कई योजनाओं का मुख्य मकसद जनता को फ़ायदा पहुंचाना है। लेकिन कई बार ऐसे-ऐसे खुलासे होते हैं जो सबको परेशानी में डाल देते हैं। इसी दौरान के बड़ा खुलासा हुआ है जिसके तहत प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) के तहत 20.48 लाख अयोग्य लाभार्थियों को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। ये जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई थी।

 

 

 

यह शुरू हुई थी योजना

 

 

 

 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान (PM Kisan Yojana) निधि योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में की थी और इसके तहत सीमांत या छोटे किसानों या जिनके पास दो हेक्टेयर से कम कृषि भूमि है, उन्हें साल में तीन बराबर-बराबर किस्तों में कुल छह हजार रुपये की राशि दी जाती है। आरटीआई आवेदन के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बताया कि अयोग्य लाभार्थियों की दो श्रेणियों की पहचान की गई है, जिनमें पहले ‘अर्हता पूरी नहीं करने वाले किसान’ हैं, जबकि दूसरी श्रेणी ‘आयकर भरने वाले किसानों’ की है।

 

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इन आकंड़ों का मांगा गई थी जानकारी

 

 

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव से संबद्ध आरटीआई आवेदक वेंकटेश नायक ने ये आंकड़े सरकार से प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अयोग्य लाभार्थियों में आधे से अधिक 55.58 प्रतिशत ‘ आयकरदाता’ की श्रेणी में हैं। नायक ने कहा, ‘‘बाकी 44.41 प्रतिशत वे किसान हैं जो योजना की अर्हता पूरी नहीं करते हैं।’’ उन्होंने बताया कि मीडिया में आई खबर के मुताबिक अयोग्य लाभार्थियों को भुगतान की गई राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नायक ने कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत प्राप्त सूचना से पता चलता है कि वर्ष 2019 में शुरू हुई पीएम-किसान योजना के तहत जुलाई 2020 तक अयोग्य लाभार्थियों को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

 

 

आंकड़ों के मुताबिक़ गलत हाथों में गई है राशि

 

 

सरकार के अपने (PM Kisan Yojana) आंकड़े संकेत देते हैं कि राशि गलत हाथों में गई। आरटीआई आवेदक ने बताया कि आंकड़ों के मुताबिक अयोग्य लाभार्थियों की बड़ी संख्या पांच राज्यों- पंजाब, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश- में है। सूचना के मुताबिक, ‘‘पंजाब शीर्ष पर है जहां कुल अयोग्य लाभार्थियों में 23.6 प्रतिशत रहते हैं, इसके बाद 16.8 प्रतिशत (3.45 लाख लाभार्थी) अयोग्य लाभार्थियों के साथ असम का स्थान है। अयोग्य लाभार्थियों में 13.99 प्रतिशत महाराष्ट्र में रहते हैं।

 

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