प्रदोष व्रत 2021: 9 अप्रैल को है चैत्र मास का प्रथम प्रदोष व्रत, जानें व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

करिश्मा राय

 

चैत्र मास का प्रथम प्रदोष व्रत  9 अप्रैल को है. इस व्रत को त्रयोदशी की तिथि को मनाया जाता है. वहीं शुक्रवार के दिन होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाता है. बता दें कि प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती समते संपूर्ण शिव परिवार की पूजा की जाती है. शिव भक्त इस व्रत को बहुत ही श्रद्धा और भक्तिभाव से रखते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है और साथ ही यह व्रत दांपत्य जीवन को खुशियों से भर देता है.

 

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

9 अप्रैल (शुक्रवार) तिथि का आरंभ-  प्रात: 3: 15 मिनट से

10 अप्रैल (शनिवार) तिथि का समापन- प्रात: 4: 27 मिनट पर

 

प्रदोष काल में पूजा मुहूत

पूजा का समय: 9 अप्रैल की शाम 5 बजकर 55 मिनट से लेकर 8 बजकर 12 मिनट तक.

 

प्रदोष व्रत की विधि

  • प्रदोष व्रत की पूजा थाली में भगवान शिव की प्रिय चीजों का सजाया जाता है.
  • पूजा की थाली में पुष्प, 5 प्रकार के फल, मिष्ठान, अबीर, गुलाल, चंदन, अक्षत, धतूरा, बेलपत्र, कपूर रखे जाते हैं.
  • इसके साथ ही शिव आरती और शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए
  • प्रदोष व्रत में नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है. इसके साथ ही स्वच्छता का भी विशेष महत्व है.
  • प्रदोष व्रत पूरे दिन रखा जाता है और इस व्रत में फलाहार किया जाता है.
  • कुछ स्थानों पर इस व्रत को निर्जला रखने की भी परंपरा है.
  • उपवास के दौरान गलत विचारों से दूर रहा जाता है और भगवान का स्मरण किया जाता है.
  • भोजन में नमक, मिर्च का सेवन न करें.

 

महिलाएं और पुरूष दोनों ही इस व्रत को रख सकते हैं. कहते हैं जिन कन्याओं के विवाह में कोई अड़चन आ रही है. या फिर विवाह में देरी हो रही तो इस स्थिति में भी प्रदोष व्रत शुभ फलदायी माना गया है. इसके अलावा दांपत्य जीवन में कलह और तनाव की स्थिति को भी प्रदोष व्रत बहुत ही कारगर माना गया है.

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