Pranab Mukherjee : बड़ी दिलचस्प है प्रणब दा की राजनीति में एंट्री की कहानी, जानिए कैसे इंदिरा गांधी ने प्रणब मुखर्जी की काबिलियत को पहचाना, कैसे हुए कांग्रेस में शामिल

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रवि श्रीवास्तव

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी हमारे बीच नहीं रहें, लेकिन उन्होंने अपने 45 साल के सियासी सफर में कई  दिलचस्प मोड़ का सामना किया है..जो अब किस्सों और कहानियों में दर्ज है, एक ऐसी ही कहानी है 70 के दशक की, जिसमें एक काबिल युवा ने अपने सपने को कुछ इस कदर साकार किया, कि एक किस्सा सा बन गया, और वो किस्सा भी ऐसा जिसमें के एक अदने से क्लर्क को देश का महामहीम बना दिया

कुल 5 बार राज्यसभा और 2 बार लोकसभा सदस्य रहे प्रणब मुखर्जी के बारे में जो लोग लिख रहे हैं। पढ़ रहे हैं वो ये बता रहे हैं कि प्रणब मुखर्जी पहली बार 1969 में चुनकर राज्यसभा पहुंचे, लेकिन ये सब हुआ कैसे, आखिर इसकी प्लोटिंग तैयार कैसे हुई, ये हम आपको बताते हैं

साल था 1969 का, जब राजनीति पढ़ाने वाले प्रणब मुखर्जी ने मन बना लिया था कि वो भी राजनीति की पुरानी परिभाषा पढ़ाकर समझाने से अच्छा राजनीति में उतरकर राजनीति की नई परिभाषा गढ़ेंगे बस फिर क्या था, प्रणब मुखर्जी ने पहली बार 1969 में मिदनापुर उप​चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदावर के तौर पर खड़े वीके कृष्ण मेनन के लिए चुनाव प्रचार किया।तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उस उपचुनाव में प्रणब मुखर्जी के चुनावी रणनीतिक कौशल से बहुत ज्यादा प्रभावित हुईं और उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का सदस्य बना दिया। इसी साल जुलाई में प्रणब मुखर्जी को कांग्रेस ने राज्यसभा भेज दिया। और इस तरह प्रणब मुखर्जी का राजनीति में औपचारिक रूप से प्रवेश हुआ।

राजनीति में एंट्री के बाद प्रणब मुखर्जी ने कभी पीछे मुरकर नहीं देखा,सबसे पहले उन्होंने जहां 1969 में संसद की दहलीज पर कदम रखा तो वहीं राज्यसभा में तीन बार चुनकर गए । साल 2004 और साल 2009 में दो बार लोकसभा से चुनकर आए प्रणब मुखर्जी ने यहां भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया, प्रणब मुखर्जी ने देश में कई बड़े मंत्रालय भी संभाले,जिनमें बतौर वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री उनकी भूमिका अहम रही। वहीं साल 2012 से 2017 तक उन्होंने देश के 13वें राष्ट्रपति के पद को सुज्जजित किया और इस तरह उनका सियासी सफर खत्म हुआ।कुल मिलाकर अपने 45 साल के राजनैतिक करियर में प्रणब मुखर्जी ने सफलता के हर उस मुकाम हो छुआ, जहां हर कोई नहीं पहुंच पाता। यही वजह है कि उनके बड़े योगदान को देखते हुए मोदी सरकार ने उन्हें भारत रत्न देकर भी सम्मानित किया, और आज उनके जाने के बाद पूरा देश उन्हें दिल से यादकर श्रद्धांजलि दे रहा है

 

 

 

 

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