राहु काल में क्यों नहीं करना चाहिए कोई शुभ कार्य, क्यों माना जाता है अशुभ, जानें कारण

 

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या मांगलिक कार्य की शुरुआत शुभ मुहूर्त देखकर ही की जाती है. ऐसा माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सफल होते हैं. वहीं, अगर कोई शुभ मुहूर्त को नजरअंदाज करता है, तो काम पूरे नहीं होते, या फिर उस काम में सफलता हाथ नहीं लगती.

 

शास्त्रों के अनुसार हर दिन 90 मिनट का टाइम ऐसा होता है, जिसमें राहुकाल लगता है और इसमें कोई भी शुभ कार्य और मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है. राहुकाल को राहुकालम के नाम से भी जाना जाता है. आइए जानते हैं क्या होता है राहुकाल, कैसे की जाती है इसकी गणना और राहुकाल को लेकर क्या मान्यताएं हैं.

 

क्या होता है राहुकाल? 

 

हर दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक आठवें भाग का स्वामी राहु होता है. राहु को असुर और छाया ग्रह माना गया है. ज्योतिष के मुताबिक हर दिन 90 मिनट का समय राहुकाल का समय होता है. इस दौरान किसी भी शुभ काम की मनाही होती है. और मांगलिक कार्य भी आरंभ नहीं किए जाते.

 

ज्योतिषियों के अनुसार दिनमान का पूरा मान घंटा मिनट में निकालें. उसे 8 बराबर भागों में बांट दें और स्थानीय सूर्योदय में जोड़ दें. ऐसा करने पर शुद्ध राहुकाल (Rahu Kaal) का पता चल जाएगा. जो भी दिन होगा, उस भाग को उस दिन का राहुकाल माना जाएगा. इस समय को सभी शुभ कार्यों के लिए वर्जित मानें वरना आपको बाधाओं और असफलता का सामना करना पड़ेगा.

 

हर दिन के अनुसार राहुकाल का समय ?

 

  • सोमवार को राहुकाल का समय- सुबह 07.30 से 9 बजे तक
  • मंगलवार को राहुकाल का समय- दोपहर 03.00 से 04.30 बजे तक
  • बुधवार को राहुकाल का समय- दोपहर 12.00 से 01.30 बजे तक
  • गुरुवार को राहुकाल का समय- दोपहर 01.30 से 3.00 बजे तक
  • शुक्रवार को राहुकाल का समय- सुबह 10.30 से 12.00 बजे तक
  • शनिवार को राहुकाल का समय- सुबह 9.00 से 10.30 बजे तक
  • रविवार को राहुकाल का समय- शाम 04.30 से 6.00 बजे तक