आखिर क्यों डूबा लक्ष्मी विलास बैंक ?.. जानिए पूरी कहानी

Laxmi Vilas Bank
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-अक्षय तेजन

 

बीते कई सालों में डूबे बैंकों (Bankrupt) की फेहरिस्त में अब लक्ष्मी विलास बैंक (Laxmi Vilas Bank) का नाम भी शामिल हो गया है. 94 साल पुराना यह बैंक करीब 80 से ज्यादा साल तक सही चलता रहा. लेकिन बीते एक दशक से समस्याएं शुरू हो गईं. जिसका कारण बताया जा रहा है कि लक्ष्मी विलास बैंक ने अलग-अलग सेक्टर्स में बड़े पैमाने पर दांव लगा दिया और यह ध्यान नहीं दिया कि कितनी पूंजी के लोन देन उसकी आर्थिक स्थिति के लिहाज से ठीक रहेगा. फिर अर्थव्यवस्था में जब मंदी का दौर आया तो बैंक को पूंजी फंस गई. यही उसके डूबने का कारण बना.

 

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लक्ष्मी विलास बैंक (Laxmi Vilas Bank) ने आर्थिक तंगी से उभरने की भरपूर कोशिश की. जिसके तहत पिछले एक दशक में लक्ष्मी विलास बैंक ने 5 सीईओ बदले. लेकिन कोई भी सीईओ दो या तीन साल से ज्यादा वक्त तक नहीं टिका. बैंक ने आर्थिक क्षमता से ज्यादा मिड साइज कंपनियों को लोन दिया जिसके बाद लोन फंसने पर बैंक के लिए संभलना मुश्किल हो गया. लक्ष्मी विलास बैंक ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर, रियल एस्टेट और टेक्सटाइल्स जैसे करीब एक दर्जन सेक्टर्स को बड़े पैमाने पर लोन बांटे. और इन कॉरपोरेट लोन्स के फंसने पर ही बैंक के पतन की शुरुआत हुई.

 

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कुछ समय पहले YES Bank को भी ऐसे ही संकट का सामना करना पड़ा था. गौरतलब है कि इस बैंक में 2007 से 2010 के दौरान वीएस रेड्डी सीईओ थे. और साल 2010 में बैंक की लोन बुक अमाउंट 3,612 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग दोगुना यानी 6,277 करोड़ रुपये हो गई थी. आपको बता दें कि बैंकिंग सेक्टर में लोन की बात करें तो कॉरपोरेट ऋण आसान टारगेट हैं जबकि रिटेल लोन के बिजनेस में कड़ी प्रतिस्पर्धा है. ऐसे में बैंक तेज ग्रोथ के लिए कॉरपोरेट लोन का रुख करते हैं, लेकिन उसमें रिस्क भी अधिक होता है.

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