SATOPANTH LAKE: इस झील से जाता है स्वर्ग का रास्ता

SATOPANTH

 

 

 

-नीलम रावत

 

देवभूमि उत्तराखंड (SATOPANTH) में ऐसी कई जगहें हैं जिनका संबंध पौराणिक काल से है। कई खूबसूरत, अद्भुत और रहस्यमयी मंदिर इस धरती पर मौजूद है और इसी कारण उत्तराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है क्योंकि स्वंय देवता यहां रहते हैं। आज हम आपको उत्तराखंड में मौजूद एक ऐसी झील के बारे में बताएंगे जिसका संबंध महाभारत से है। इतना ही नहीं ये भी कहा जाता है कि इस झील से स्वर्ग का रास्ता भी जाता है। उत्तराखंड में स्थित इस झील का नाम है सतोपंथ। संतोपथ का अर्थ होता है-सत्य का मार्ग। माना जाता है कि पांडव स्वर्ग के लिए इसी रास्ते से गए थे। इसी कारण इस जगह का महत्व कई अधिक बढ़ जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडवों ने स्‍वर्ग जाने के रास्‍ते में इसी जगह पर स्नान किया था। इसके बाद ही उन्‍होंने आगे का सफर तय किया था। इसलिए भी इसे अत्‍यंत पवित्र झील माना जाता है।

 

 

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सबसे अलग झील का आकार

 

 

 

अधिकतर झील गोल या लंबाई आकार वाली होता है। लेकिन इन सबसे अलग (SATOPANTH) सतोपंथ झील त्रिकोण आकार में है। मान्‍यता है कि यहां पर एकादशी के पावन अवसर पर त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश ने अलग-अलग कोनों पर खड़े होकर डुबकी लगाई थी। इसलिए इसका आकार त्रिकोण है। झील के आकार की ही तरह इसके अस्तित्‍व को लेकर भी कई मान्‍यताएं है। इनमें से एक यह है कि सतोपंथ में जब तक साफ-सफाई रहेगी, त‍ब तक ही इसका पुण्‍य प्रभाव रहेगा। यही वजह है कि झील के रखरखाव का खास ख्‍याल रखा जाता है।

 

 

 

स्वर्ग की सीढ़ियां

 

 

 

सतोपंथ झील से कुछ दूर आगे चलने पर (SATOPANTH) स्‍वर्गारोहिणी ग्‍लेशियर नजर आता है। इसे ही स्‍वर्ग जाने का रास्‍ता कहा जाता है। माना जाता है कि स्वर्गारोहिणी ग्‍लेशियर पर सात सीढ़ियां हैं जो कि स्‍वर्ग जाने का रास्‍ता हैं। ग्लेशियर के सीढ़िनुमा आकार को ही सात सीढ़ियां माना जाता है। हालांकि इस ग्‍लेशियर पर तीन सीढ़‍यिां ही नजर आती हैं. बाकी बर्फ और कोहरे से ढकी हुई होती हैं।

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