हनुमान ने इस स्थान पर फेंका था शनि पिंड, दर्शन करने से पापों से मिलती है मुक्ति

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-नीलम रावत

शनि देव न्याय के देवता है जो भक्तों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देता है. इसी कारण भक्तों को सबसे अधिक भय शनिदेव का ही होता है. लेकिन, मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक ऐसा धाम स्थित है जिसके दर्शन करने से भक्तों के सभी पाप दूर हो जाते है. ये मंदिर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित है और इसका नाम शनिचरा मंदिर है. शनिचरा मन्दिर इसके बारे में कहा जाता है कि यहां हनुमानजी के द्वारा लंका से फेंका हुआ अलौकिक शनिदेव का पिण्ड है

शनिदेव के दर्शन से दूर होती है गरीबी

मध्यप्रदेश में स्थित इस मंदिर में शनिचरी अमावस्या के दिन मेला लगता है. भक्तजन यहां तेल चढ़ाते हैं, और अपने पहने हुए कपड़े, चप्पल, जूते आदि सभी यहीं छोड़कर घर चले जाते हैं.

इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से पाप और दरिद्रता से छुटकारा मिल जाता है. माना जाता है कि शनिचरा मंदिर में शनि शक्तियों का वास है और जो भक्त सच्चे मन से इस स्थान पर आकर शनिदेव की उपासना करता है उसके हर दुख-दर्द को शनिदेव दूर कर देते हैं.

हनुमान ने फेंका था शनि पिंड

माना जाता है कि शनिदेव की ये प्रतिमा आसमान से टूट कर गिरे एक उल्कापिंड से निर्मित है. ज्योतिषी मानते है कि शनि पर्वत पर निर्जन वन में स्थापित होने के कारण यह स्थान विशेष प्रभावशाली है. महाराष्ट्र के शिंगनापुर शनि मंदिर में प्रतिष्ठित शनि शिला भी इसी शनि पर्वत से ले जाई गई है.

कहते हैं कि हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराकर उन्हें मुरैना पर्वतों पर विश्राम करने के लिए छोड़ा था. मंदिर के बाहर हनुमान जी की मूर्ति भी स्थापित है और इसी कारण शनिदेव के इस मंदिर को सिद्धपीठ माना जाता है.
मुरैना जिले में स्थित शनिचरा मंदिर के चमत्कार किसी से नहीं छुपे हैं. इस स्थान पर लोगों की अपार आस्था है. शनि देव सबकी मुरादें भी पूरी करते हैं. यहां शनि देव जिस जगह गिरे थे वहाँ एक बड़ा-सा गड्ढा हो गया था. यह गड्ढा आज भी यहाँ पर मौजूद है. शनिवार एवं शनिश्चरी अमावस्या के दिन आज भी यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

राजा विक्रमादित्य ने करवाया निर्माण

भगवान शनि देव इस चमत्कारिक जगह पर त्रेतायुग में आकर विराजमान हुए थे. बताया जाता है कि यहाँ पर शनि देव के मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था. जिसके बाद शनि देव की महिमा और चमत्कारों से प्रभावित होकर ग्वालियर के तत्कालीन महाराजा दौलतराव सिंधिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया. वर्तमान में यह मंदिर मध्य प्रदेश सरकार के अधीन है. जिसका प्रबंधन मुरैना जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है.

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