Wednesday, February 1, 2023
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पेपर लीक मामले को दलीय हथकंडा नहीं बनाया जाना चाहिए-धारीवाल

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Shanti Dhariwal, जयपुर 24 जनवरी (वार्ता) : राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने आज विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार पेपर लीक मामले में तेजी से जांच कराकर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने का प्रयास करेगी, इसलिए इस मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की जिद्द छोड़ देनी और इसे दलीय हथकंडा नहीं बनाया जाना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने आज विधानसभा में पेपर लीक मामले पर हुई बहस का जवाब देते हुए यह बात कही। धारीवाल ने कहा कि पेपर लीक एवं परीक्षाओं में नकल को रोकने के लिए नये नये प्रावधान किए गए ताकि पेपर लीक रुक सके। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पेपर लीक जैसे मामलों में प्रयत्न करने वाले तक को अपराधी की श्रेणी में शामिल किया है और ऐसे मामले में आरोपी को अधिकतम दस वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया जबकि इससे पहले इसमें केवल तीन वर्ष तक की ही सजा का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि संपत्ति जब्त करने का कानून रखा गया और 14 मार्च 2022 को पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) में नकल विरोधी सेल का गठन किया।

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उन्होंने कहा कि किसी अन्य राज्य में इतने कठोर कानून पेपर लीक एवं नकल मामले में नहीं हैं जितने राजस्थान में हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में जो परीक्षार्थी इसमें शामिल पाये गये उनको परीक्षाओं से वंचित किया गया है और इस मामले से संबंधित कर्मचारियों को बर्खास्त किए गए है और आरोपियों के भवन भी ध्वस्त किए गए है। उन्होंने कहा कि सरकार का हरसंभव प्रयास है कि पेपर लीक नहीं हो और इसके लिए उसने पेपर गिरोह को नवीन अधिनियम के तहत कठोर संदेश दिया है।  धारीवाल ने सांसद हनुमान बेनीवाल के लोकसभा में उठाए गए प्रश्न का हवाल देते हुए कहा कि उनके प्रश्न के जवाब में केन्द्र सरकार ने बताया कि राजस्थान में सीबीआई के पास आये 12 मामलों में दस को दर्ज किया गया और सात पर क्लोजर रिपोर्ट दे दी गई तथा एक मामले में दोष मुक्त कर दिया जबकि दो मामलों की अभी जांच चल रही है। उन्होंने राजस्थान के एक पुराने शिवानी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय श्री भैंरों सिंह शेखावत ने विधानसभा में कहा था कि यह मामला सीबीआई के पास नहीं जाता तो राज्य सरकार इसमें जांच कर लेती। ऐसे में पेपर लीक मामले को अगर सीबीआई जांच के लिए दे दिया गया तो 15 साल भी इसमें निर्णय नहीं आने वाला और नौजवानों का भविष्य बिगड़ जायेगा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में तेजी से जांच कराई जा रही है और बराबर मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके, इसलिए इस मामले में विपक्ष को सीबीआई की जिद्द छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार उनकी इस मांग को खारिज कर रही है। बहस के दौरान पेपर लीक मामले को लेकर एक भवन गिराये जाने के उठाये गए मुद्दे का जिक्र करते हुए धारीवाल ने कहा कि भू स्वामी अनील अग्रवाल ने स्थगन लेने का प्रयास किया लेकिन न्यायालय ने उसके अवैध निर्माण को ध्वसत करने के आदेश दिए और न्यायालय के आदेश के बाद ही इस भवन को ध्वसत किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में जांच चल रही है और भवन किराये के बारे में जांच में पता चलेगा।

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धारीवाल ने बताया कि वर्ष 2014 से 2018 के बीच दस प्रतियोगिता परीक्षाओं में पेपर लीक मामलों को लेकर 19 मामले दर्ज किए गए और 241 लोगों को गिरफ्तार किया गया जबकि वर्ष 2019 से 2022 तक ऐसे मामलों में 15 प्रकरण दर्ज कर 281 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने सदस्यों द्वारा पेपर लीक होने के बाद जो परीक्षा रद्द हो गई उसके दुबारा होने में कई दिन लग जाने के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि गत 24 दिसंबर को एक पेपर रद्द हो गया था उसे 29 जनवरी को फिर कराया जा रहा है, इससे जल्दी फिर से परीक्षा का आयोजन क्या हो सकता है, ऐसे में इसे दली हथकंडा नहीं बनाया जाना चाहिए। इससे शिक्षा मंत्री बी डी कल्ला ने इस मामले में दिए वक्तव्य में कहा कि परीक्षाओं में पेपर लीक नहीं हो इसके प्रति सरकार गंभीर है और इसके लिए कानून को और सख्त बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ जायेगी। डा कल्ला ने कहा कि भू माफिया एवं शराब माफिया की तरह नकल माफिया बन गया है और पक्ष एवं विपक्ष सबको मिलकर इसे रोकने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए सरकार ने कानून भी लाई है और पेपर लीक मामले में सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक करोड़ 12 लाख की संपत्ति जब्त की गई है वहीं इसमें शामिल कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है और सख्त से सख्त कार्रवाई की गई हैं। बहस के दौरान जब धारीवाल ने कहा कि जवाब तो सुनते जाइये, इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया एवं अन्य सदस्यों के बोलने पर  धारीवाल एवं सत्ता के पक्ष के अन्य सदस्यों के बोलने पर सदन में हंगामा हुआ और शोरगुल हो गया। इस पर अध्यक्ष डा सी पी जोशी ने एक बजकर 57 मिनट पर सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी।

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