विपक्ष दलों की जवाबी कार्रवाई से त्रिपुरा में बढ़ा तनाव

अगरतला 25 नवंबर (वार्ता) त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से महज दो महीने पहले कानून-व्यवस्था की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है क्योंकि विपक्षी दलों ने राज्य भर में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जवाबी हमला किया है जिससे तनाव और बढ़ गया है। कथित तौर पर, विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), टिपरा मोथा और कांग्रेस ने पिछले कुछ हफ्तों से दक्षिण त्रिपुरा, गोमती, सिपाहीजाला और खोवाई जिलों में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले शुरू कर दिए हैं। ये हमले विपक्षी दलों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों में बाधाओं का सामना करने पर हुए हैं। पुलिस ने बताया कि कथित तौर पर टिपरा-मोथा के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को भाजपा के आदिवासी मोर्चा के महासचिव डैविड देववर्मा पर सिपाहीजाला जिले के सुतारमुरा इलाके में हमला किया।

यह हमला भाजपा के एक कार्यक्रम के दौरान हुआ। जिस जगह पर श्री देववर्मा पर हमला हुआ, वह राज्य के उपमुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा के विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। पुलिस के मुताबिक श्री डैविड और उनकी टीम पर हुए हमले से एक दिन पहले माकपा कार्यकर्ताओं ने खोवाई में किए गए भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था, जिसमें भाजपा के कम से कम 12 कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हाल ही में, दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया, गोमती के काकराबन, सिपाहीजाला के सोनमुरा, कमालपुर और धलाई जिले के गंडाचेर्रा में भाजपा कार्यकर्ताओं को इसी तरह के हमले का सामना करना पड़ा था, जिसके बारे में विपक्षी दलों ने भाजपा के ‘हमले’ के खिलाफ ‘निवारक कदम’ होने का दावा किया था। श्री देववर्मा ने आरोप लगाया है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सुतारमुरा गांव में घर-घर जाकर प्रचार करने और वहां पार्टी के सम्मेलन की तैयारी का निरीक्षण करके वापस लौटते समय उन पर हमला किया गया। आरोप है कि टिपरा मोथा के करीब 40 कार्यकर्ताओं ने हम पर लाठियों से हमला किया और गाली-गलौज की। उन्होंने कहा,“हमलावरों ने हमें इलाके में भाजपा की किसी भी गतिविधि को आगे नहीं बढ़ाने की चेतावनी दी और कहा कि हम अब बाहर न निकलें, जो निंदनीय है और राज्य में सद्भाव को समाप्त करने का प्रयास है।” उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी पार्टी की इस तरह की आतंकवादी गतिविधियां निंदनीय है और इससे राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किए जा रहे स्वदेशी लोगों की विकास गतिविधियों में बाधा आएगी। माकपा के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने कहा कि भाजपा ने चुनाव जीतने के दिन से ही पूरे त्रिपुरा में हमले और अत्याचार जारी रखे हुए हैं। पिछले 57 महीनों में पुलिस की मौजूदगी में भाजपा के गुंडों द्वारा विपक्षी दलों के सैकड़ों घरों, दुकानों और पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। वहीं, कांग्रेस विधायक सुदीप रॉयवर्मन ने कहा,“गैर-भाजपा दलों के बड़ी संख्या में निर्दोष समर्थकों ने अपनी आजीविका के विकल्प खो दिए हैं। सरकारी कल्याण और सुविधाओं से वंचित हैं। उनमें से कई को जीवित रहने के लिए भाजपा के आपराधिक गिरोह में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया है और अब वे सत्ताधारी दल से पीछे हट रहे हैं।” इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के राज्य प्रभारी राजीब बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने 2018 के बाद हुए किसी भी चुनाव में लोगों को मतदान करने की अनुमति नहीं दी है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कड़ी सुरक्षा में भी दो बार तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हमला किया है। पश्चिम बंगाल के कई मंत्रियों और पार्टी कार्यकर्ताओं पर त्रिपुरा में बार-बार हमले हुए, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “कोई भी पार्टी भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला नहीं करती है। वास्तव में उन युवाओं ने हमला किया, जिन्हें भाजपा नेताओं द्वारा आकर्षक नौकरियों का वादा किया था, लेकिन अंततः उन निर्दोष लोगों को धोखा दिया गया। कोई समझौता नहीं किया जाता बल्कि उन पर आपराधिक मामले ठोंक दिए जाते हैं। इसलिए, वे युवा शत्रुतापूर्ण हो गए और स्थानीय नेताओं से बदला ले रहे हैं।”