अदालत ने पत्रकार रमानी को राहत देते हुए दी यह हैरान करने वाली दलील

journalist Ramani

 

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

मी-टू मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री एमजे अकबर की तरफ से दायर आपराधिक मानहानि केस में पत्रकार प्रिया रमानी (journalist Ramani) को राहत मिलने से पुरे मीडिया जगत में हलचल है। एमजे अकबर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताकर यह मानहानि का मुकदमा किया था। लेकिन इस मामले को खारिज करते हुए कोर्ट ने जो दलील जारी की वो सबको हैरान करने वाली है।

 

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पौराणिक कथाओं का कोर्ट ने दिया उदारण

 

 

इस दौरान कोर्ट की तरफ से पौराणिक (journalist Ramani) कथाओं का जिक्र किया गया। कोर्ट ने रामायण का हवाला देते हुए उस वक्त का वर्णन किया जब सीता को रावण पुष्पक विमान में हरण कर ले जा रहा होता है, और कहा कि महारानी सीता की रक्षा के लिए जटायु आया था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि महिलाओं को यह अधिकार है कि दशकों के बाद भी अपने साथ हुए अन्याय को सामने रखे। उसने कहा कि भारत की महिलाओं को सिर्फ बराबरी की आवश्यकता है।

 

जिसका सामाजिक दर्जा है वो भी उत्पीड़न का शिकार हो सकता है

 

 

एमजे अकबर बनाम प्रिया रमानी (journalist Ramani) केस में कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि एक व्यक्ति जिसका सामाजिक दर्जा है, वह भी यौन उत्पीड़क हो सकता है। कोर्ट ने कहा है कि एक ऐसा शख्स जिसकी सामाजिक प्रतिष्ठा अच्छी हो वह यौन उत्पीड़न करने वाला भी हो सकता है। यौन उत्पीड़न से सामाजिक प्रतिष्ठा और मनोबल भी गिरता है। छवि के अधिकार को मर्यादा के अधिकार की कीमत पर नहीं सुरक्षित किया जा सकता।

 

 

एमजे अकबर मी-टू कम्पैन में नाम आने के बाद किया था मुकदमा

 

 

एमजे अकबर ने प्रिया रामानी (journalist Ramani) के खिलाफ यह कहते हुए आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था कि प्रिया रमानी की तरफ से मी-टू कैंपेन के दौरान किए गए ट्वीट से उनकी मानहानि हुई है। जबकि उनके ऊपर इस तरीके के आरोप इससे पहले कभी नहीं लगे थे। अदालत में इस मामले पर विस्तृत बहस के बाद आज यह फैसला सुनाया गया है। गौरतलब है कि साल 2018 में मी टू अभियान के तहत रमानी ने अकबर पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे।

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