जिस जज ने सुनाई मुशर्रफ को सजा, उसकी हो गयी कोरोना से मौत

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-अक्षत सरोत्री

 

पाकिस्तान (Pakistan) में आतंकियों के पनाहगारों को सजा मिलना एक दिखावा होता है। यह बात पूरी दुनिया जानती है। कई ऐसे तानशाह हुए जिन्हें सजा तो हुई लेकिन उसके बाबजूद जज की मौत हो गयी लेकिन यह तानशाह आज भी ज़िंदा हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। पाकिस्‍तान के पूर्व सैन्‍य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ (Musahraf) को फांसी (Hang) की सजा सुनाने वाले पेशावर के चीफ जस्टिस वकार सेठ (Seth) की कोरोना से मौत हो गई। जस्टिस (Justice) सेठ 59 साल के थे। उनके परिवार में पत्‍नी और एक बेटी हैं। जस्टिस सेठ 22 अक्‍टूबर को कोरोना (Corona) वायरस पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद उन्‍हें पेशावर के अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्‍हें कुलसुम इंटरनैशनल हॉस्पिटल इस्‍लामाबाद में भर्ती कराया गया। यहां पर भी डॉक्‍टर उनकी जान नहीं बचा पाए।

 

दिसंबर 2019 में जस्टिस सेठ ने परवेज मुशर्रफ को सुनाई थी सजा

 

 

 

 

दिसंबर 2019 में जस्टिस सेठ ने परवेज मुशर्रफ को 3 नवंबर 2007 को आपातकाल लगाने के लिए मौत की सजा सुनाई थी। पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेठ द्वारा लिखे गए 167 पन्ने के फैसले में कहा गया था कि यदि फांसी दिए जाने से पहले मुशर्रफ की मौत हो जाती है तो उनके शव को इस्लामाबाद के सेंट्रल स्क्वायर पर खींचकर लाया जाए और तीन दिन तक लटकाया जाए।

 

यह था वो फैसला जो सुनाया गया था फैसला

 

 

 

फैसले के अनुसार, ‘हम कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश देते हैं कि भगोड़े/दोषी को गिरफ्तार करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी जाए और सुनिश्चित करें कि कानून के हिसाब से सजा दी जाए। अगर वह मृत मिलते हैं तो उनकी लाश को इस्लामाबाद के डी चौक तक खींचकर लाया जाए तथा तीन दिन तक लटकाया जाए।’ विस्तृत फैसले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी कानूनी टीम से परामर्श किया और उनके शीर्ष सहायकों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठक के फैसले की घोषणा की गई। कानून मंत्री फरोग नसीम ने कहा कि फैसला दिखाता है कि जज सेठ मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं क्योंकि उन्होंने कहा कि अगर पहले मुशर्रफ की मौत हो जाती है तो उनके शव को फांसी पर लटकाया जाए।

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