इनके बिना अधूरे हैं महाकाल के दर्शन, यहां भक्तों के सामने होता है चमत्कार

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-नीलम रावत, संवाददाता

देवों के देव हैं महादेव. हर दुख को खुद पर लेकर भक्तों को भयमुक्त करने वाले है भोले. पहले तो उन्होंने समुद्र मंथन में निकले विष को पीकर देवताओं को बचाया और नीलकंठ कहलाए, फिर उन्होंने उज्जैन में ब्रह्मा को राह दिखाने के लिए न सिर्फ अपने नेत्र से काल भरैव को प्रकट किया बल्कि भक्तों की बुराईयों को अपने अंदर समाने के लिए खुद मदिरा का पान करने लगे.

महाकाल की नगरी में चमत्कार

महाकाल की नगरी उज्जैन में हर दिन चमत्कार होता है. यहां हर दिन भगवान भक्तों की मदिरा रूपी बुराई को निगल लेते हैं और उनके हर कष्ट को दूर कर देते है. मृत्यु के स्वामी और कालों के काल महाकाल की नगरी है उज्जैन. महाकाल की इसी नगरी में बसा है एक ऐसा मंदिर जहां स्वयं काल भैरव साक्षात दर्शन देते हैं.

उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थापित इस मंदिर में शिव अपने भैरव स्वरूप में विराजते हैं. यूं तो भगवान शिव का भैरव स्वरूप रौद्र रूप है. मगर कालभैरव अपने भक्तों की करूण पुकार सुनकर उसकी मदद के लिए दौड़े चले आते हैं. काल भैरव के इस मंदिर में मुख्य रूप से मदिरा का ही प्रसाद चढ़ता है. मंदिर के पुजारी भक्तों के सामने तश्करी से मदिरा रुपी प्रसाद काल भैरव को चढ़ाते हैं और देखते-देखते ही भक्तों की आंखों के सामने घटता है.

कष्टों को दूर करते हैं काल भैरव

वैसे तो काल भैरव के इस मंदिर में पैर रखते ही मन में एक अजीब सी शांति का एहसास होता है. लगता है मानो सारे दुख दूर हो गए लेकिन कालभैरव को ग्रहों की बाधाएं दूर करने के लिए जाना जाता है. भक्त अगर इस मंदिर में आकर भगवान को भोग लगाता है तो उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. बिल्कुल वैसे ही जैसे कालभैरव को शिव की आराधना से मिली थी.

कालभैरव के बिना अधूरे महाकाल दर्शन

सदियों पुराने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसके दर्शन के बिना महाकाल की पूजा भी अधूरी मानी जाती है. कालभैरव के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि अगर कोई उज्जैन आकर महाकाल के दर्शन करे और कालभैरव न आए तो उसे महाकाल के दर्शन का आधा लाभ ही मिलता है.

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