इस स्थान को कहते हैं मोक्ष की नगरी, पिंडदान करने से आत्मा को मिलती है मुक्ति

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-नीलम रावत, संवाददाता

पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है. भारत में कई जगहों पर पिंडदान किया जाता है. लेकिन, बिहार के गया में लोग दूर-दराज से पिंडदान करने आते हैं. बिहार में स्थित गया ना सिर्फ हिंदू बल्कि बौद्ध धर्म की आस्था का भी प्रमुख स्थल है.

पिंडदान के लिए क्यों प्रसिद्ध गया

गया में पिंडदान करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है. गया में पिंडदान करने देश ही नहीं विदेशों से भी लोग पितपृक्ष के दौरान आते हैं. ऐसा माना जाता है कि यहां पर पिंडदान करने से सात पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है.

पुराणों में गया का जिक्र

पुराणों में भी गया की महत्वता का जिक्र किया गया है. गरुण पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति श्राद्ध कर्म करने के लिए गया जाता है, उसका एक-एक कदम पूर्वजों को स्वर्ग की तरफ ले जाता है. यहां श्राद्ध करने से पूर्वज सीधे स्वर्ग जाते हैं. क्योंकि इस स्थान पर स्वंय भगवान विष्णु पितृ देवता के रूप में मौजूद हैं. इसलिए गया को पितृ तीर्थ स्थल भी कहा जाता है.

राक्षस के नाम पर पड़ा नाम

गया तीर्ख स्थल का नाम गयासुर नामक राक्षस से पड़ा है. पुराणों के अनुसार, भस्मासुर के वंश में एक गयासुर नाम का राक्षस था. जिसने अपनी तपस्या से ब्रह्माजी को प्रसन्न कर लिया था और एक वरदान मांगा था कि उसका शरीर भी देवताओं की तरह पवित्र हो जाए और दर्शन मात्र से सभी लोग पाप से मुक्त हो जाएं. ब्रह्माजी के वरदान से गयासुर के जो भी दर्शन करता है वह पापों से मुक्त हो जाता और सीधे स्वर्ग पहुंच जाता था.

इससे स्वर्ग के देवता परेशान हो गए. इस समस्या से मुक्ति के लिए देवताओं ने गयासुर से पवित्र स्थल की मांग की. तब गयासुर ने अपनी पीठ पर यज्ञ करने की आज्ञा दे दी. जब वह लेटा तब उसका शरीर पांच कोस तक फैल गया तब देवताओं ने यज्ञ करना शुरू कर दिया. इससे देवताओं ने प्रसन्न होकर गयासुर को वरदान दिया कि जो भी इस स्थान पर अपने पितरों के लिए श्राद्ध कर्म और तर्पण करेगा, उसको मुक्ति मिल जाएगी.

माता सीता ने किया था पिंडदान

गया में भगवान राम, माता सीता, और लक्ष्मण ने राजा दशरथ का पिंडदान किया था. गया में रेत का भी पिंडदान किया जाता है. दरअसल इसके पीछे कहानी है कि जब भगवान राम इस जगह राजा दशरथ का पिंडदान करने पहुंचे थे तब वह सामग्री जुटाने के लिए अपने भाई के साथ नगर चले गए थे. उनको वापस लौटने में देर हो गई. तब राजा दशरथ ने उनको दर्शन देकर कहा कि पिंडदान का समय निकल रहा है इसलिए जल्दी मेरा पिंडदान करें. तब माता सीता ने रेत से पिंड बनाया और फल्गु नदी, अक्षय वट, एक ब्राह्मण, तुलसी और गाय को साक्षी मानकर उनका पिंडदान कर दिया.

बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल

हिंदुओं के अलावा बौद्ध धर्म के लोगों के लिए गया पवित्र स्थल है. दरअसल बोधगया को भगवान बुद्ध की भूमि भी कहा जाता है. इसी स्थान पर बोधि वृक्ष के नीचे तपस्या कर भगवान गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, जिसके बाद से वे बुद्ध के नाम से जाने गए. देश-विदेश से लोग भगवान बुद्ध के इस स्थल को देखने आते हैं.

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