उत्तराखंड त्रासदी की वो तस्वीरें जो दिखा रही हैं वहां का मंजर

Uttarakhand tragedy

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

उत्तराखंड में चमोली (Uttarakhand tragedy) जिले के रैणी गांव में रविवार को एक ग्लेशियर के टूटने से बाढ़ आने से कम से कम 150 लोगों के मरने की आशंका है। ग्लेशियर टूटने और बाढ़ आने से यहां विनाश के निशान इस आपदा की कहानी खुद ही बयां कर रहे हैं।

 

 

 

 

ग्लेशियर के टूटने के कारण 13.3 मेगावाट ऋषिगंगा जल विद्युत (Uttarakhand tragedy) परियोजना पूरी तरह से ध्वस्त हो गई और अलकनंदा नदी में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आ गई। डीजीपी ने कहा कि तपोवन बांध में फंसे हुए 16 लोगों को पुलिस ने बाहर निकाल लिया है और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि यह आपदा आज सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर आई और चमोली में दो बांध को इससे नुकसान पहुंचा है। आपदा (Uttarakhand tragedy) के बाद राज्य का आपदा तंत्र राहत बचाव अभियान के लिए जुट गया है।

 

 

 

 

नदी किनारे स्थित कई (Uttarakhand tragedy) घरों और झोपड़यिां तेज बहाव में बह गई हैं और बाढ़ के रास्ते में आने वाले कई पेड़ बह गए हैं। ऋषि गंगा और अलकनंदा के बढ़ते जल स्तर को कम करने के लिए देश के सबसे ऊंचे टिहरी बांध से पानी का प्रवाह फिलहाल रोक दिया गया।

 

 

 

 

श्रीनगर बांध से पानी का बहाव तेजी से बढ़ने और तेज जल प्रवाह के मद्देनजर नदी के किनारों के सभी गांवों और निचले इलाकों को तुरंत खाली करवा लिया गया। प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेकर लौटे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में शाम को संवाददाताओं को बताया कि अभी तक आपदा में सात व्यक्तियों के शव बरामद हुए हैं।

 

 

 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा प्रतिवादन बल और पुलिस के जवान बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं और तपोवन क्षेत्र में स्थित जिन दो सुरंगों में मजदूर फंसे हुए हैं वहां मुस्तैदी से बचाव कार्य चल रहा है।

 

 

 

 

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपए का मुआवजा देने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘एक अनुमान के तहत लापता लोग सवा सौ के आसपास हो सकते हैं या इससे ज्यादा भी हो सकते हैं।

 

 

 

 

जो कंपनी के लोग हैं वे भी कागज लापता होने की वजह से ज्यादा बता पाने की स्थिति में नहीं हैं।’ बाढ से दोनों पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है । दोनों परियोजनाओं के शीर्ष अधिकारी नुकसान का आंकलन करने में जुट गए हैं।

 

 

 

 

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क से (Uttarakhand tragedy) निकलने वाली ऋषिगंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में आई बाढ के कारण ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदी ने विकराल रूप घारण कर लिया था जिससे गढवाल क्षेत्र के कई हिस्सों में दहशत का माहौल पैदा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रातः अचानक जोर जोर की आवाजों के साथ धौली गंगा का जलस्तर बढ़ता दिखा।

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